काव्य :
विधा दोहे
प्रीति भरा त्योहार यह,
अनुपम लगता आज।
भ्रात भगिनी साथ करें,
जी भरकर सब नाज।।1।।
यम द्वितिया का दिवस यह,
पावन,परम , पुनीत।
रोली ,कुमकुम तिलक से,
बहन निभाये रीत।।2।।
भैया तेरे द्वार पर,
हो भगिनि का सत्कार।
नेह भरे हर स्नेह की,
बहती हो रसधार।।3।।
कर कामना मंगल की,
मन से करे पुकार।
यश वैभव सब ही बढ़ें,
सुखमय हो संसार।।4।।
रिश्तो की बगिया सजे,
अमिट रहे यह प्यार।
करती मंगल कामना,
आती रहें बहार।।5
- श्रीमती श्यामा गुप्ता दर्शना भोपाल
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