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वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच, भोपाल इकाई की गोष्ठी सम्पन्न


 वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच, भोपाल इकाई की गोष्ठी सम्पन्न

भोपाल।  शनिवार दिनांक १६.११.२०२४ को आभासी पटल पर नरेश नाज़ द्वारा संस्थापित वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की सफल काव्य गोष्ठी संपन्न हुई । गोष्ठी में मुख्य अतिथि उत्तराखंड इकाई की अध्यक्ष श्रीमती महेश्वरी कनेरी जी रहीं,  श्रीमती कांति शुक्ला जी विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा कार्यक्रम अध्यक्ष वनकाम की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती जया आर्य तथा इकाई अध्यक्ष श्रीमती कमला चंद्रा जी की उपस्थिति ने मंच को सम्मानित किया।

श्रीमती मधुलिका श्रीवास्तव के सुगठित संचालन में गोष्ठी तय समय सीमा में सम्पन्न हुई।

भोपाल, सीहोर, हैदराबाद से प्रतिभागियों ने जुड़कर एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत करीं ।

मध्यप्रदेश इकाई की महासचिव संतोष श्रीवास्तव जी ने बीज वक्तव्य देते हुए चिंता व्यक्त की कि वर्तमान में काव्य भाव की उत्तेजना महसूस नहीं होती कवियों को और सक्रिय होने की आवश्यकता है। मीनाक्षी सिलाकारी की सरस्वती वंदना से आरंभ गोष्ठी का आगाज श्रीमती सरोज लता सोनी की कविता से हुआ ।जनक कुमारी बघेल की कविता स्पंदन में धरती मां की व्यथा थी तो नमिता सेनगुप्ता की कविता में सतपुड़ा के पर्णपाती वनों की खूबसूरती का वर्णन रहा। कुमकुम सिंह के सुमधुर  कंठ से ग़ज़ल आईना की प्रस्तुति लाजवाब रही ।वसुधा श्रीवास्तव की कविता में बुजुर्गों के साथ समय बिताने का संदेश था । डॉ . साधना शुक्ला ने प्रश्न उठाती कविता "किससे करें सवाल ये जर्जर हवेलियां "कहीं।करूणा दयाल ने अपनी कविता में 'एकाकी मन' का चित्रण किया। आशा सिंन्हा कपूर ने मौसम पर आधारित कविता कहीं ।रजनी यादव की कविता डर ,आतंक,नफरत पर आधारित रही। अंतिम प्रस्तुति के रूप में ऊषा चतुर्वेदी की कविता  का विषय 'सबको आजादी चाहिए 'रहा । विशिष्ट अतिथि कांति शुक्ला ने सभी रचनाओं को सराहते हुए आशावादी और असीमित संभावनाओं से भरपूर  कहा । उन्होंने वर्तमान परिस्थिति पर मुक्तक के साथ गीत प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि महेश्वरी कनेरी जी ने मुक्त कंठ से सभी प्रतिभागियों की हौसला अफजाई की और बेटियों को संदेश देती शानदार कविता 'न हताश हो न निराश हो,हौसलों का पंख ले तू उड़ जरा 'सुनाई।

कार्यक्रम अध्यक्ष जया आर्य ने 'काश कि तू आ जाए 'कविता के साथ सबको सबकी सुनें अपनी सुनाएं का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में दुर्गा रानी श्रीवास्तव ने युद्ध की विभीषिका पर कविता कहते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

कमल चंद्रा

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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