सफ़लता के रहस्य
अतीत की नींव पर वर्तमान खड़ा होकर ही भविष्य के ताने बाने बुनता है वह न तो अपने अतीत को भूल सकता है और न स्वर्णिम भविष्य के सपने को ।यह वर्तमान ही केवल उसके हाथ में रहता है जहां उसके अगल -बगल भूत और भविष्य हैं । अतीत बीता हुआ कल जो इतिहास के पन्नों में सिमट कर हमें हमारी वर्तमान स्थिति तक पहुंचने की गाथा कहता हुआ अच्छे और बुरे के आकलन में सहायता करता हुआ वर्तमान को संवारने की शिक्षा देता है जिस पर भविष्य की कल्पना का सुंदर महल खड़ा होगा । उसके लिये आधार का शक्तिशाली होना आवश्यक है।एक दृढ़ संकल्पित लक्ष्य जिसको पाने के उद्यम की आवश्यकता । साहस के साथ आगे बढ़ते हुये पग अपने कठिन परिश्रम तप और साधना के बलबूते पर उसे प्राप्त कर ही लेते हैं। यहां निराशा के। लिये कोई स्थान नहीं ऊर्जावान होने के लिये हमें अपनी आत्म शक्ति को जागृत कर आस्था और विश्वास के साथ ही आगे बढ़ना पड़ेगा ।अपने अस्तित्व के अहं को लेकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं । जिसने अपने आपको अपनी शक्ति को पहचान लिया उसके लिये इस संसार मे कुछ भी असंभव नहीं । तुलसीदास जी की इन पंक्तियों के साथ कि :-
*सकल पदारथ हैं जग माही,
कर्महीन नर पावत नाहीं ।।*
यही सत्य है और सफलता का मूल रहस्य ।केवल अतीत के ढोल पीट कर ही हम नहीं रह सकते । वर्तमान को कर्म करने के बाद ही उसका फल सुनहले भविष्य के रूप में मिलेगा ।
*काल करे सो आज कर ,आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होयेगी,बहुरि करेगा कब *।।
- उषा सक्सेना-भोपाल
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