काव्य :
छठ पर्व
पंचतत्व की अराधना,
ऊर्जा की लिए कामना
त्योहार का है स्वरूप
सूर्य की ये उपासना ।
सात्विक प्रवृति प्रबल,
तमस हो रहा धूमिल,
स्वच्छ चेतना,साधनामय मन
पुलकित वातावरण ,
इच्छापूर्ति ऊर्जादाता
जीवन पथ हुआ सूर्यमय
हर आगंन प्रकाश का मंदिर,
आदित्यमल के गूँजते गीत,
दीपो के त्योहार की विदाई
सृष्टि के दिये की अगुआई ,
पालनकर्ता सृजनहार देव,
दसो दिशाओ मे फैली आस्था
प्रकृति की अनोखी अराधना,
उगते डूबते सूर्य को अर्घ्य,
नदी तालाब बने पूजास्थल,
महिमामंडित छठ माता ।
ऊर्जा शक्ति प्रकाश पर्व,
समृद्धि की ये दाता ।
- रानी पांडेय
रायगढ छत्तीसगढ।
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