काव्य :
राम आये हैं
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राम आये हैं,अपने श्री राम आये हैं|
आज भारत में वो उल्लास लाये है|
दशरथ नन्दन प्रभु श्री राम आये हैं|
भाव दिव्यता के भारत में वो लाये हैं|
राम मन्दिर के लिए बलिदान हुए जो
पांच सौ बरस का परिणाम लाये हैं|
मन्दिर बने पुरखों की जो रही भावना
सब भक्तों के हृदय में विश्राम लाये हैं|
कार सेवक हुए हैं बलिदान जितने
उनके लिए रामजी पुण्य धाम लाये हैं|
साधुजन प्राण त्यागे राम मन्दिर के लिए
प्रभु राम जी परम सुख धाम लाये हैं|
राम मन्दिर बनेगा,जो रहे बाट जोहते
उर में उनके अतिशय आराम लाये हैं|
आज अपना सौभाग्य हुआ जागृत जो
प्रभु अपने श्री राम सुख धाम आये हैं|
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प्रदीप मणि तिवारी/ध्रुव भोपाली,भोपाल,म.प्र.
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