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काव्य : भारत भूमि - डा.नीलम ,अजमेर


 काव्य : 

भारत भूमि


भक्ति की पावन धरा

शक्ति से अभिमंत्रित,

नाद की सुरसरिता में

शिव-शक्ति का वास है।


सुर-नाद की गूँजार यहाँ

प्रकृति का भंडार भरा,

धरती की स्वर्ग-धरा पर

पवित्र आत्माओं  का वास है।


पंछियों का मनोरम कलरव,जीव-जंतुओं

का सम निवास यहाँ,

त्रिशूल,त्रिपुण्ड,त्रिनेत्र-

धारी,त्रिपुरारी का वास है।


द्वैत,अद्वैत,अद्वैतादैत,

निर्गुण-सगुण की बहती

भक्ति सलीला है,पीर,

फकीर , फरिश्तों

का रहता सदैव वास है।

   -  डा.नीलम ,अजमेर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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