जहाँ हरियाली है वहाँ जीवन है इटारसी का एक प्रेरक उदाहरण है खेड़ा का 'शांति धाम श्मशान घाट'
इटारसी । सतपुड़ा की घनी वादियों के बीच, नर्मदा अंचल की पावन छांव में बसा इटारसी शहर,सिर्फ एक रेलवे जंक्शन या औद्योगिक नगर नहीं,बल्कि पर्यावरण, संस्कृति और सेवा की धरती भी है।
इसी धरती पर स्थित है - गोकुल नगर खेड़ा का 'शांति धाम श्मशान घाट',जहाँ पिछले 2011 से बिना किसी सरकारी सहयोग के वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण का कार्य हो रहा है। इस प्रेरक पहल के नायक हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद पगारे , जिन्होंने जन सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर इसे सिर्फ एक दाह संस्कार स्थल नहीं,बल्कि एक हरित, स्वच्छ और शांतिपूर्ण स्थान में बदल दिया है।
जब हमारे परिजन अपनी अंतिम यात्रा पर जाते हैं,तो यही स्थान उन्हें एक सम्मानजनक, स्वच्छ और हरियाली से घिरा अंतिम पड़ाव प्रदान करता है। आज लगभग चार एकड़ में फैले इस श्मशान घाट में वृक्षों की हरियाली, बैठने की व्यवस्था और शांत वातावरण, हर आगंतुक को यह सोचने पर मजबूर कर देता है किअगर संकल्प हो तो बिना सरकारी सहयोग के भी चमत्कार संभव हैं।
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