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काव्य : सुनो ना ! - मिष्टी गोस्वामी , दिल्ली


 काव्य : 

सुनो ना ! 


सुनो 

क्या मुझे पहाड़ की चोटी समझे थे

कि वहां तक चढ़कर तुम शिखर पा जाओगे

मैं तो महासागर की गहराई में छुपी

एक छोटी सी नदी हूं

मिलोगे तो डूब जाओगे

मैं काशी के घाट सी भी नहीं

कि तुम्हे मोक्ष मिले

मैं तो शिव की आंख से बहा

वो अश्रु हूं,जो रुद्राक्ष बन लटका है पेड़ पर

मैं

वो नदी हूं 

जो तुम्हे बहाकर 

नर्मदा में पहुंचा देगी

फिर डूब जाना नर्मदा के अश्रुओं में

क्योंकि वहां से निकला साधारण सा पत्थर भी

शालिग्राम बन निकलता है 

खुद खो जाओगे 

तभी तो मुझे पाओगे। 


 - मिष्टी गोस्वामी , दिल्ली


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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