काव्य :
बारिश की सुहानी रुत
ये मौसम बारिशों का है
सुहानी रुत बताती है,
कहीं कीचड़ जमाती है
कहीं जीवन बनाती है।
सकल ब्रह्मांड में धरती
ही जीवन शिरोधार्य करती,
पंच इंद्रिय, पंच तत्वों से
हममें प्राण है भरती।
बरसता है कभी बादल
तरसता है कहीं घायल,
लगी पावन झड़ी शीतल
सिहरती प्राण की कोयल।
-डाॅ. सुधा कुमारी
नई दिल्ली
Tags:
काव्य
.jpg)
