काव्य :
श्री गणेश वंदना
रिद्धि सिद्धि के देवता,गणपति श्री गणेश ,
वक्रतुण्ड महाकाय,करते हैं कृपा विशेष।
कदली फल, मोदक का,लगता है भोग,
शरणागत जो आ गया,हरते कष्ट कलेश।
आवाहन है आपका,पधारो श्री महाराज,
प्रथम आपको पूजते,ब्रम्हा विष्णु महेश।
लम्बोदर आप हैं,गजानन जग विख्यात,
ह्रदय विराजते आपके,उमा सहित उमेश।
बिन आप आशीष के,सफल न हो काज,
अनुनय करते आपका,दीजे बुद्धि गणेश।
- श्रीपति रस्तोगी,लखनऊ
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