काव्य :
विघ्नहर्ता गणराज
आ गए हैं गणपति महाराज।
नित प्रतिदिन करो नए-नए सत्कार।।
जीवन में आए आशीषों का उपहार
जिससे जीवन में आएगी बहार ।
घर-घर विराजे गणपति महाराज ।
पूरन होते सबके काज ।।
रिद्धि सिद्धि को संग लेकर चलत है।
मात-पिता के वे परम भगत हैं।।
पुत्र द्वि पाए शुभ लाभ ।
उनसे होत हैं जगत में प्रलाभ।।
रिद्धि सिद्धि संग गणपति विराजे
सुख-दुख संग जीवन साजे।।
विघ्नहर्ता संग मूषक सवारी।
दर्शन से मिटे संशय सारी।।
शुभ लाभ संग गणपति के द्वारे।
हरते दुख ,सुख देते आपरे।।
माता है पार्वती शक्ति स्वरूपा।
जग जननी, करुणा ,अमर, अनूपा।।
पिता भोलेनाथ है त्रिपुरारी ,दयाला ।
सृष्टि के पालनहार कृपाला ।।
शिव शक्ति संग जननी जगपाल।
गणपति के माता-पिता है बड़े कृपाल
गणपति विघ्नहर्ता ,कार्तिकेय वीर।
शिव शक्ति के पुत्र जगत के अधीर।।
गणपति विघ्नहर्ता है ,कृपालु दयाल ।
अपने संग रखते भक्तजनों का ख्याल।।
ऐसे हैं गणपति महाराज ।
सबके विघ्नहारो हे गणराज।।
घर घर बिराजे गणपति महाराज ।
पुरण करते सबके काज।
- श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर जी बहुत सुन्दर काव्य प्रस्तुति
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