काव्य :
वृक्ष हैं भगवन
श्री गणेश जी गण में रहें
जन गण में रहें
मूर्ति में समाएँ
आस्था बन जन जन को जगायें
न हो मूर्तियों का विसर्जन
माटी में मूर्तियों के
बसें, बीज ,प्राण बनकर
हो माटी में बीजों का अंकुरण
अंकुर बनें वृक्ष
बनी रहे आस्था,
हो वृक्षारोपण
वृक्ष रूप में दें हमें
वे दिव्य दर्शन
वृक्षरोपण भक्ति बने
आस्था हमारी शक्ति बने
यों पूजें हम सतत
वृक्ष हैं भगवन।
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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