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अनंत चतुर्दशी को जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया निर्वाण लाडू


अनंत चतुर्दशी को जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया निर्वाण लाडू

इन्द्रिय विषयों पर पूर्ण संयम रख किंचित मात्र भी परिग्रह न करना उत्तम ब्रह्मचर्य है - पं. संतोष कुमार

धन से निर्धन हो सकते हो लेकिन धर्म से धन्य होना निश्चित है - सजल भैया

दशलक्षण व्रत के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की हुई आराधना

ललितपुर। सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित तालबेहट के दोनों जैन मंदिरों में दशलक्षण व्रत के अंतिम दिन शनिवार को सुबह धर्माबिलंबियों ने मंदिर पहुँचकर नित्यमय अभिषेक शांतिधारा पूजन विधान की क्रियाओं में बढ़चढ़ कर भाग लिया। अनंत चतुर्दशी महापर्व पर निर्वाण लाडू चढ़ाकर जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गयी। तत्पश्चात उमस्वामी कृत तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन कर अर्घ समर्पित किये। दोपहर की बेला में श्रद्धालु मानसरोवर से जल लेकर आये फिर पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में वार्षिक कलशाभिषेक का आयोजन किया गया। धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए पं. संतोष कुमार जैन अमृत ने कहा इन्द्रिय विषयों पर पूर्ण संयम रख किंचित मात्र भी परिग्रह न करना उत्तम ब्रह्मचर्य है। जीवन में वस्तु का त्याग नहीं कर सकते तो उसे सीमित करने का प्रयास करो। संसार विषयों में यदि सुख होता तो तीर्थंकर उसका त्याग क्यों करते। सायं कालीन बेला में मंगल आरती के कार्यक्रम में वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर से डीजे बैंड की धार्मिक धुनों पर मंगल आरती की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, श्रद्धालु भक्तिमय संगीत की धूनो पर खूब झूमे नाचे। जो कीर्ति स्तम्भ से वापस मंदिर जी पहुँची जहाँ भक्तामर पाठ के साथ 48 दीपक प्रज्वलित कर मूलनायक भगवान की महाआरती की गयी। श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से आये सजल भैया ने कहा धन से निर्धन हो सकते हो लेकिन धर्म से धन्य होना निश्चित है। उन्होंने कहा की यदि बचपन में बच्चों को मंदिर और पाठशाला जाना सिखा दिया तो वह बुढ़ापे में तुम्हें मंदिर ले जाएंगे, क्योंकि शिक्षा से पहले संस्कारों का होना जरुरी है। धन शरीर और सम्बंधियों से राग रखना व्यर्थ है यदि जिनेन्द्र भगवान से ममत्व कर लिया तो भव पार हो जाओगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत एक मिनट प्रतियोगिता में भव्या भंडारी एवं अंकित जैन ने बाजी मारी। पवित्र जैन एवं पुनीत जैन का प्रदर्शन सराहनीय रहा। शास्त्र सजाओ प्रतियोगिता में शुभम जैन सेंकी प्रथम रागिनी भंडारी द्वितीय एवं सुहानी मोदी तृतीय रहीं। दस दिन आयोजित प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किये गये एवं आगंतुक विद्वान् का सम्मान किया। कार्यक्रम में कार्यक्रम में वीरेंद्र कुमार वैभव जैन, शोभा जैन अनीता देवी, गुणमाला जैन, महेंद्र कुमार, पुष्पेंद्र विरधा, प्रवीन भंडारी, देवेन्द्र मोदी, श्रेयांश जैन, राकेश सतभैया, जितेंद्र बड़ौरा, धर्णेन्द्र जैन, चक्रेश कुमार, सुशील मोदी, प्रदीप एड, अरविन्द कुमार, विकास भंडारी, कपिल मोदी, हितेंद्र पवैया. विकास पवा, रोहित बबीना, संतोष कुमार, कमलेश सिर्सी, भूपेंद्र जैन, विनय गरेठा, सुनील करैरा, नीलेश  गरेठा, सुरेंद्र विरधा, अंजेश गुन्देरा, अरविन्द जैन, पंकज भंडारी, स्वतन्त्र जैन, मनीष  कुमार, रुपेश भंडारी, अजय कुमार, अमन जैन, सिद्ध जैन, विनम्र, पारस, पुनीत, आगम जैन सहित  सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन अनिल जैन एवं मयूर चौधरी ने किया। आभार व्यक्त अरुण मोदी एवं विशाल जैन पवा ने किया। अंत में भारतीय जैन मिलन के अध्यक्ष विशाल जैन पवा ने सभी का आभार व्यक्त किया। पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष अरुण मोदी ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के समापन पर रविवार को क्षमावाणी महापर्व मनाया जायेगा। जिसके अंतर्गत सुबह चौसठ रिद्धि महामंडल विधान दोपहर में श्रीजी जी भव्य रथयात्रा तत्पश्चात अभिषेक शांतिधारा फूलमाल के बाद क्षमापना दिवस मनाया जायेगा।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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