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काव्य : उस युग में भी...- इंजी. अरुण कुमार जैन , फरीदाबाद


 काव्य : 

आज मातृ दिवस पर, माँ को...

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उस युग में भी...

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इंजी. अरुण कुमार जैन 

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आज नहीं हो प्यारी माँ तुम, बहुत याद आती है,. बीते कई हजार दिनों के,

स्मृति सुख लाती है.

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मैं छोटा था, आँचल तेरे,

सदा प्यार करती थीं, चलना सीखा, चली साथ संग, प्यारी वह धरती थी.

स्कूल भेजा,पढ़ने मुझको,

आगे सतत बढ़ाया,

संग पिताजी, नित श्रम करके, मंजिल तक पहुँचाया.

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मेरा भी इक नीड़ बसाया,

मेरा ब्याह रचाकर,

उसमें नन्हे, मुन्ने प्यारे से बच्चों को लाकर,

रमा उन्हीं में, वे मेरे धन,

आगे उन्हें बढ़ाया,

जैसा श्रम था, माँ नित तेरा, वही बहू में आया.

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कभी फोन से,कभी स्वयं ही,मिलते हम सब माँ से,

बच्चे, पोते, पोती करते, प्यारी बातें माँ से.

अशक्त हो गयीं, प्यारी माँ तुम, उम्र की सीढ़ी चढ़के,

नब्बे से ऊपर भी पहुंची,

धर्म के पथ पर चलके.

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निर्बल काया, थी माँ  तेरी,

चिंता सबकी करती,

खाना खा लो, सो जाओ अब,माँ तुम सबसे कहती.

सेवा का सौभाग्य मिला कुछ,हम सब मिल करते थे,प्रभु सुमिरन में देह त्याग हो, चिंतन यह करते थे.

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प्रभुभक्ति, मंदिर के दर्शन,

नित माँ चाह तुम्हारी,

श्रद्धा,भक्ति,समर्पण प्रभु में, ऐसी माँ थी प्यारी.

छोड़ गयीं माँ और एक दिन,

 मैं भी था संग तुम्हारे,

पलभर में ही,सूना घर था,

विकल, व्यथित थे सारे.

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स्मृतियाँ बस आज हैं मन में, कहीं स्वर्ग हो माता,

प्रेम, नेह, अनुराग, समर्पण, सेवा की वह गाथा.

चली गयीं हो, पर लगता है, माँ हो निकट हमारे,

अश्रु बहते इन नयनों से,

गाते गीत तुम्हारे.

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नल,बिजली,पथ,भवन नहींथे,टी.वी.कार न ए.सी

उस युग में भी पूर्ण तृप्ति माँ, हम सबको तुमने दी थी.

इसीलिए तो कल्पवृक्ष थी,

कामधेनु भी संग थीं,

सबकुछ हमको देने वाली,

अमृतधारा तुम थीं.

कोटि नमन, वंदन माँ तुमको, मन, वचन और काया से,

नेह, प्रेम,साधना, सेवा,

वर सृजन भी पाएं तुमसे.

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संपर्क //अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88,फ़रीदाबाद, हरियाणा,

मो. 7999469175.

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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