अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम के अधिवेशन में संस्कार शाला नाटिका का मंचन 14 सितम्बर को
मंदसौर। चाहे पाॅलीथीन का अंधाधुंध उपयोग हो या खाना झुठा छोड़ने का फैशन , पर्यावरण का सर्वनाश करने की साजिशें या बेहिसाब पैसे की होड़। आधुनिक जीवन शैली की इन विडंबनाओं पर समाज का ध्यान आकर्षित करने एवं नयी पीढ़ी को संस्कारित करने की जरूरत को बताते हुए संस्था की महिला समूह द्वारा नाटिका "संस्कार शाला" का मंचन मारवाड़ जंक्शन के निकट मेवाड़ भवन कामलीघाट देवगढ़ में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन में आगामी 14 सितम्बर को किया जाएगा।
नाटिका की लेखिका द्वय श्रीमती संगीता , श्रीमती नीलम और निर्देशिका श्रीमती चन्दा डांगी जो कि संस्था की मध्यप्रदेश इकाई की सह सचिव भी है ने बताया कि इस अधिवेशन में देश के कोने कोने से से करीब डेढ़ सौ प्रतिनिधियों के शिरकत करने की संभावना है।
इस अधिवेशन में जैन साहित्यकारों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन, परिसंवाद, कविसम्मेलन तथा सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाले व्यक्तित्वों का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान भी किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि इस नवगठित संस्था का पहला अधिवेशन गत वर्ष लोढ़ा धाम मुम्बई में आयोजित हुआ था जिसकी सफलता से प्रेरित होकर वर्ष भर में संस्था ने कई आयामों और व्यक्तित्वों को जोड़ा है यह पूरे जैन समाज में एक अभिनव प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
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