काव्य :
दोहे नवरात्रि पर
माँ तुम जननी जगत की,करती जग उद्धार।
कृपा आपकी बरसती,मिलता प्यार अपार।।
दीप ज्ञान का जल रहा,लगता मां में ध्यान।
राह कठिन है मां करो,मेरा तुम कल्याण।।
ब्रह्मचारिणी मातु को,करते सभी प्रणाम।
नौ देवी की नवरात्रि,द्वितीय तेरे नाम।।
तप करती तपश्चारिणी , निर्जल निरहार।
हाथ जोड़कर पूजते ,हो देवी अवतार।।
करना अंबे तुम दया ,रखना मेरी लाज।
भक्तों के तुम कर रही, माता पूरे काज।।
आए दिन नवरात्रि के, बना आगमन खास।
श्रद्धा से सब पूजते, पूरी होती आस।
मण्डप देखो सज गया, कलश स्थापना आज।
देवी का पूजन करो, बनते बिगड़े काज।।
अदभुत प्रथम स्वरूप है, शैल सुता का रूप ।
करते हैं आराधना, देवी बड़ी अनूप।।
मंगलमय उत्सव यही, गाए मंगल गान।
नौ देवी जो पूजते, हो जाता कल्याण।।
जग जननी, जगदंबिका, नौ देवी अवतार।
आदिशक्ति वरदायनी, पूजें बारंबार।।
शक्ति स्वरूपा मातु श्री, करती है उद्धार।
विनती करने आ गए, माता के दरबार।।।।
- डॉ भावना शुक्ल
नोएडा (उ. प्र.)
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