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काव्य : रिटायरमेंट - मिष्टी गोस्वामी , दिल्ली


 काव्य : 

रिटायरमेंट

अरे जल्दी करो, मुझे मेट्रो तक पहुंचा आओ
देरी हो रही है, बच्चे इंतजार कर रहे हैं 
कहां जाओगी  वृन्दा?
तुम तो रिटायर हो चुकी हो!
रख दो ये पर्स, लंच 
चलो चाय पीते हैं साथ साथ
सुकून भरी |
सालों से भागते दौड़ते पीती रहीं हो!
क्या !
 सच में  रिटायर हो गई मैं?
क्या मेरा डेस्क, मेरा बोर्ड, मेरी लायब्रेरी चेयर
मेरा इंतजार ना करती होगी?
वो दूर तक गूंजती
*“Good Morning, Ma'am”* 
सूनी ना हो जायेगी मेरे बिन
मेरी एक पूरी जिंदगी
मेरे डेस्क की ड्रॉर में रखी छोड़ आई मैं 
अपनी बहुत सारी खुशियां
बहुत सारे आंसू
संजो कर रखे हैं वहीं
क्या सब वहीं रह जायेंगे?
कितनी बार  हारीथकी,
खींचकर ले गई अपने आप को चौथी मंजिल तक
क्या मेरी सिखाई शिक्षा 
बच्चों का भाग्य नही बदल रही थी ?
फिर मैं कैसे रिटायर हुई?
मेरी पोस्ट (पद )रिटायर हुई है! 
मैं तो हर रोज मन से सही समय 
पहुंच जाती हूं स्कूल
एक गुरु, एक मां, एक पत्नी, एक सखी 
ऐसे ही ना जाने कितने रिश्तों में बंधी मैं 
कभी रिटायर हो ही नहीं सकती
कभी नहीं! 
क्यूंकि आने वाली पीढ़ी
मेरी शिक्षा से ही तो आगे बढ़ेगी
वो मेरी जगह लेगी
मैं कभी रिटायर हो ही नहीं सकती!
खाली वो कुर्सी, वो जगह, वो पोस्ट
यही रिटायर हो सकते हैं
मैं तो समय की तरह बढ़ती ही रहूंगी
मैं तो आज भी हमेशा की तरह ही चल रहीं हूं भाग रहीं हूं
या शायद
मेरी जगह मेरे आंसू भाग रहे हैं।
_________________________________
 एक शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता
एक नई जर्नी (सफर) उसका  इंतजार कर रही है।

 - मिष्टी गोस्वामी , दिल्ली
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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