काव्य :
चांद सजन सा
कहां मैं हूं कुछ सजन, बिना तुम्हारे,
तुम संग बीते रैन, हो तुम्हीं तो सुकून सा सबेरा।
खुशियों की चमक लिए चांद सजन सा मेरा
तुमसे ही तो हूँ मैं ,सारा अस्तित्व तुम्हीं से है मेरा ।
आपके प्रीत में ही बीत जाए ,उमर सारी
प्राण उखड़ते तक ,रहे हमारा रेन बसेरा
प्रीत की जोत ,जलती रहे जीवन भर
तुमसे से ही तो हूँ मैं सारा अस्तित्व तुम्हीं से है मेरा।
हर सांस धड़कन में हो तुम, प्रिय तुमसे बंधी है प्रीत डोरी,
तुम सजाते रहो मांग, मरूं सुहागन यही अभिलाषा हो पूरी
जीवन ऊंजेरा तुम ही , तुम साथ तो घेरे न कभी तिमिरा,
तुमसे ही तो हु मैं ,सारा अस्तित्व तुम्हीं से है मेरा l
तुम्हारे कदमों के निशानों पर पग पग कदम बढ़ाऊं ,
जिस दिशा में ले चलो हाथ पकड़आंखे मूंदे चली जाऊं।
हमसफ़र संग तुम्हारे बुढ़ापा बीते तुमबिन जीवन अमेरा,
तुमसे ही तो हूँ मैं, सारा अस्तित्व तुम्हीं से ही है मेरा।
- श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना महासमुंद
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