ad

भोपाल में कहानी अपनी–अपनी का आयोजन हुआ


 

भोपाल में कहानी अपनी–अपनी का आयोजन हुआ

“एक बार क्या हुआ...”

बस इतना सुनते ही, मन किसी अनकही कहानी के इंतज़ार में खो जाता है।

आँखें उत्सुक हो उठती हैं — आगे क्या हुआ? — और दिल की धड़कनें थोड़ा तेज़ हो जाती हैं।

चाहे शोर करती हुई कोई क्लास हो या दादी–नानी के आसपास बैठे बच्चे — जैसे ही कहानी शुरू होती है, हर ओर सन्नाटा छा जाता है।

वो पल, जब हम सब अपने-अपने “Once upon a time” के दौर में लौट जाते हैं — कितना मधुर अहसास होता है!

आज हमारे एकांत पार्क में आयोजित “स्टोरी टॉक” का विषय भी यही था — कहानी अपनी–अपनी।

सभी अपने जीवन के उस सुनहरे ‘वन्स अपॉन अ टाइम’ को साझा करने के लिए उत्साहित थे।

बचपन — हर इंसान के जीवन का सबसे सुंदर समय।

वही दिन जब छोटी-छोटी घटनाएँ भी हमें बड़ी लगती थीं।

कभी डराया जाता था, कभी बहलाया जाता था — और कभी उन डाँटों के पीछे छिपा प्यार समझ ही नहीं आता था।

अपरणा ने बताया कि उसकी माँ अक्सर कहती थीं —

“अगर तुमने ज़िद की तो बाबा को बुला दूँगी।”

सच में, हर किसी के जीवन में कोई न कोई “काला बाबा” जरूर होता है।

मीनाक्षी ने मुस्कुराते हुए कहा —

“जब भी मैं पढ़ने बैठती और तभी लाइट चली जाती, तो लगता जैसे भगवान ने मेरी सुन ली! वह मेरे बचपन की सबसे बड़ी खुशी थी।”

राजश्री ने अपना अनुभव साझा किया —

“मुझे बचपन में अक्सर कहा जाता कि मैं कचरे के ढेर से उठाई गई हूँ।

वो मज़ाक था शायद, पर उस ‘ट्रॉमा’ ने मुझे बड़ा होने तक नहीं छोड़ा।”

हर बच्चे की यही कहानी होती है —

जिस चीज़ से रोका जाए, वही करने की जिज्ञासा सबसे ज़्यादा होती है।

माँ की रोक-टोक तब समझ नहीं आती, और गुस्से में बच्चे कह देते हैं —

“ठीक है, मैं घर छोड़कर चला जाऊँगा!”

लेकिन जब राज सच में अपने सपनों के पीछे घर से दूर निकले,

तब उन्हें बचपन की वही बातें याद आईं।

उन्होंने अपनी माँ के लिए एक कविता सुनाई —

 माँ, आजकल मुझे तेरी याद बहुत आती है,

अनजान शहर में तेरी याद तड़पाती है...

ऐसे ही सबने अपने-अपने बचपन के किस्से सुनाए —

हँसी, शरारत, डर, मासूमियत — सब एक साथ लौट आए।

हम सब कुछ देर के लिए अपने बचपन की उस गलियों में खो गए,

जहाँ लौटना अब बस यादों में ही संभव है।

सुभद्रा कुमारी चौहान की ये पंक्तियाँ जैसे उस पल को सजीव कर गईं —

“बार-बार मधुर याद आती है मुझको बचपन तेरी,

गया ले गया तू जीवन की मस्त खुशी मेरी...”

0

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post