काव्य :
:ः गीत ः
ये है कुदरत की जादूगरी,
मिल रही है यहाँ हर खुशी,
मेरी किस्मत भी कैसे लड़ी,
लगा दी प्यार की फुलझड़ी,
तेरे आने से हलचल मची,
देख कितनी इमारत गिरी,
ये अजूबा है कितना बड़ा,
कन्हैया भी लाइन में खड़ा,
बीत जायेगी हर इक घड़ी,
प्यार से बड़कर कुछ भी नहीं,
- विनय चौरे , इटारसी
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