पिपलिया में पाठक मंच संगोष्ठी : "गिलोल" लघुकथा संग्रह की समीक्षा हुई
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर । जिले के प्रमुख कस्बे पिपलिया में कवि लेखक साहित्यकार एवं सामाजिक सांस्कृतिक क्षेत्रों में सक्रिय वर्ग द्वारा गठित पाठक मंच के बैनर तले अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार लेखक श्री भगवती प्रसाद गेहलोत के लघु कथा संग्रह गिलोल पर संगोष्ठी आयोजित की गई ।
सोशल मीडिया के दौर चलते छपी पुस्तकों को पढ़ने के लिए पिपलिया मंडी में पहली बार पाठक मंच प्रारंभ किया गया । सर्व प्रथम जिले के साहित्यकार श्री भगवती प्रसाद गेहलोत की प्रकाशित लघु कथा संग्रह ' गिलोल ' पर अपने विचार व्यक्त किए गए ।
कवि श्री बालुराम कराड़ा ने कहा , ' इस लघु कथा संग्रह में दैनिक जीवन में जो घट रहा है और जो बातें व व्यवहार जीवन को प्रभावित कर रही हैं उन बिंदुओं को लघु कथाओं के माध्यम से प्रासंगिकता के साथ सुरुचिपूर्ण शब्दों में संजोकर समाधान तक ले जाने की कोशिश की है । ये कथाएं हमें सोचने - समझने के लिए विवश करती है ।"
युवा लेखक सोनुगिरी गोस्वामी ने कहा , ' कथाएं सामाजिक व पारिवारिक जीवन से जुड़ी होकर इनमें मनुष्य की प्रवृत्ति का चित्रण किया गया है ।' गीतकार श्री राजेन्द्र कैथवास ने कहा , ' गिलोल कथा संग्रह गागर में सागर भरने की उक्ति को सिद्ध करता है , इसमें जीवन के विविध प्रसंगों को बहुत ही खूबसूती से प्रस्तुत किया है । '
सामाजिक सेवा से जुड़े श्री वासुदेव धनोतिया ने कहा , ' मानव समाज में समय , अन्तराल, परिस्थितियां व संसाधन के बदलते स्वरूप के साथ मनुष्य के बदलते दृष्टिकोण व व्यवहार का समुचित आयना यह गिलोल पुस्तक प्रस्तुत करती है। मोलभाव,मजा , आदत नियम , सिद्धांतवादी, नोटबंदी का बहाना, पुलिस बाबू ऐसी ही कथाएं हैं ।'
फौजी भंवरलाल सैनी ने कहा , ' गिलोल में वर्तमान समय में मनुष्य की आदतों में आ रहे नकारात्मक परिवर्तन को बखूबी से उभार कर पाठकों को ओर समाज को सोचने के लिए विवश किया है कि क्या सही है और क्या ग़लत ।'
कवि श्री सुनिल सोलंकी संजीत ने कहा , गिलोल रोचक कथाओं का संग्रह है जिसमें कई सामाजिक मुद्दों को उठाया गया है, शिक्षाप्रद है।' सुरेश जैन ने कहा , ' सामाजिक मुद्दों अधिकारियों, कर्मचारियों की लालफिताशाही को संक्षेप व सरल भाषा में उभारकर प्रस्तुत किया है पुस्तक पठनीय है । '
वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश तेलकार ने बताया कि गिलोल लघुकथा संग्रह में मेरे बाल सखा श्री भगवती प्रसाद गेहलोत ने हमारे रोजमर्रा के जीवन में आने वाली समस्याओं से रूबरू कराया है। यह मनुष्य के व्यवहारों का एक आयना है जिसमें चुटिली-व्यंगात्मक शैली में लघु कथाओं को संजोकर गागर में सागर का काम किया है। सुधि पाठक उससे प्रेरणा लेंगे । अंत में सभी पाठकों लेखकों कवियों साहित्यकारों का संपादक लेखक श्री भगवती प्रसाद गेहलोत ने आभार माना और कहा कि लघु कथा संग्रह गिलोल पर व्यक्त किए विचार संबल देने के साथ आगे लिखने में दिशा प्रदान करेंगे ।
इस अवसरों पर गणमान्य जनों के साथ पत्रकार एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे ।
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