ad

काव्य : ग़ज़ल - एस के कपूर"श्री हंस" , बरेली


 काव्य : 

।। ग़ज़ल।।

।।काफिया।। आए ।।

।। रदीफ।।   रखना   ।।

1

हौसलों के चराग तुम जलाए  रखना।

हर सूरत में कदम तुम बढ़ाए  रखना।।

2

बहुत नाजुक होती है डोर  रिश्तों की।

रिश्तों को सलीके से निभाए   रखना।।

3

जान लो कि जो बीत गई सो  बात गई।

मत उन बातों को दिल से लगाए रखना।।

4

सात परदे भी चीर सच  आता है बाहर।

मत कभी सच को झूठ से दबाए रखना।।

5

जिम्मेदारी ही जिंदगी का नाम है दूसरा।

यह बोझ तुम हमेशा    ही उठाए रखना।।

6

माना फूल ही नहीं राह में मिलते कांटे भी।

मगर तुम   सफर  हमेशा ही चलाए रखना।।

7

*हंस* ये जज्बा जोशो जनून कम न होने पाए।

बस सीने में आग तुम   हमेशा लगाए रखना।।


-  एस के कपूर"श्री हंस" , बरेली


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post