काव्य :
।। ग़ज़ल।।
।।काफिया।। आए ।।
।। रदीफ।। रखना ।।
1
हौसलों के चराग तुम जलाए रखना।
हर सूरत में कदम तुम बढ़ाए रखना।।
2
बहुत नाजुक होती है डोर रिश्तों की।
रिश्तों को सलीके से निभाए रखना।।
3
जान लो कि जो बीत गई सो बात गई।
मत उन बातों को दिल से लगाए रखना।।
4
सात परदे भी चीर सच आता है बाहर।
मत कभी सच को झूठ से दबाए रखना।।
5
जिम्मेदारी ही जिंदगी का नाम है दूसरा।
यह बोझ तुम हमेशा ही उठाए रखना।।
6
माना फूल ही नहीं राह में मिलते कांटे भी।
मगर तुम सफर हमेशा ही चलाए रखना।।
7
*हंस* ये जज्बा जोशो जनून कम न होने पाए।
बस सीने में आग तुम हमेशा लगाए रखना।।
- एस के कपूर"श्री हंस" , बरेली
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