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काव्य : लाखों बार मरोगे तुम... - इंजी. अरुण कुमार जैन , फरीदाबाद


 काव्य : 

लाल किले पर कार विस्फोट

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  लाखों बार मरोगे तुम...

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इंजी. अरुण कुमार जैन

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 दस, ग्यारह को लाल किले पर,

खूनी मंजर फिर आया,

 यू. पी.,गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर,काला साया.

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 सुखद शाम थी कई हजारों, आने जाने वाले थे,

दिन भर मेहनत मजदूरी कर, बच्चों तक जाने वाले थे.

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 हत्यारी कार के शोलों ने,

इन मासूमों को मार दिया, जमात,जैश, दरिंदों ने,

यह कैसा अत्याचार किया?

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अमृत,पंकज, जुम्मन,मोहसिन, ओमान की लाशें पसर गयीं,

कई हजारों बिलख रहे हैं,

 खुशियां जिनकी उजड़ गयीं.

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 शपथ डॉक्टर सारे लेते,

सब की जान बचाने की,

 डॉक्टर शाहिन,मुजम्मिल,सदिया, क्या ली थी, सबको मरवाने की?

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 तुम बेटी व साथ डॉक्टर,

 फरिश्ता, दरवेश ना बन पायीं,

 जहरीली नागिन, चुडैल बनी,

मां  कोख की लाज न रख पायीं.

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नहीं डॉक्टर, दरिंदे, कातिल!!

 मासूमों को मार दिया..?

 माता-पिता, बहन, भाई थे, 

क्यों संसार उजड़ दिया??

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गद्दार कौम के,मात पिता के,

 देश धर्म के पापी हो..,

थूकेंगी दुनियाँ कई युगों तक,

 तुम इतने अपराधी हो...

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अपने ही घर में आग लगाते,

क्या सोचा! खुद बच पाओगे?

कई जन्मों तक रोज मारोगे,

 जी कर भी ना मर पाओगे.

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 जो हत्या अत्याचार सिखाये,

धर्म कभी ना हो सकता..

 जो नित जनसंहार सिखाये,

  वह इंसान नहीं हो सकता.

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 लाखों की हत्या करने के,

 मंसूबे तुमने पाले थे..

 फिर जन्नत की हूर मिलेगी,

 वहाँ जश्न मानाने वाले थे.

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दोजख में स्थान तुम्हारा,

 वहीं जीना -मरना होगा,

 साथ तुम्हारे जितने भी थे,

सड़ सड़ कर मारना होगा..

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आने वाली नस्ले तुम पर,

 थूकेंगे साल हजारों तक..

 सात पीढ़ियां भी सिसकेंगीं,

 दरिंदगी, वहशी कामों पर.

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तीन हजार किलो जहर से,

मारने वाले थे लाखों में,

लाखों बार मरोगे तुम,

  युग -युग तक बंद सलाखों में.

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संपर्क //अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88,फ़रीदाबाद, हरियाणा, मो.

7999469175

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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