“दम-ख़म दिखाती बेटियां” ऑनलाइन काव्य गोष्ठी संपन्न
(महिला क्रिकेट विश्वकप 2025 की खिलाड़ियों को समर्पित)
वाराणसी। काशी साहित्यिक संस्थान ट्रस्ट द्वारा महिला क्रिकेट विश्वकप 2025 की विजेता खिलाड़ियों को समर्पित एक विशेष ऑनलाइन काव्य गोष्ठी “दम-ख़म दिखाती बेटियां” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से कवि एवं कवयित्रियाँ सम्मिलित हुईं और बेटियों की शक्ति, संघर्ष, साहस एवं सफलता पर केंद्रित अपनी सशक्त रचनाओं के माध्यम से काव्य-पुष्प अर्पित किए।
कार्यक्रम का संचालन अंजलि किशोर बरनवाल तथा किरन अग्रवाल प्रतापगढ़ (उ.प्र.) द्वारा एवं सरस्वती वंदना ममता तिवारी ने प्रस्तुत की। आयोजन की सूत्रधार एवं संस्थान की संस्थापक सुनीता जौहरी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि, “भारत की बेटियां अब हर क्षेत्र में नये इतिहास रच रही हैं, यह काव्य गोष्ठी उन्हीं को समर्पित है जो राष्ट्र की पहचान बन चुकी हैं।” कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं में बेटियों के पराक्रम और अस्तित्व की झलक प्रस्तुत की। राम किशोर पाठक ने कहा कि,“धरती से अंबर तक फैली, जिसकी गाथा खास है।”तो नीलम प्रभा सिन्हा ने नारी के संकल्प को स्वर दिया ,“तोड़कर सारे बंधनों की बेड़ियां, बढ़ रही हैं आज ये सब बेटियां।” तो मंजू दलाल मंजरी का स्वर गूंजा ,“कब थी कमजोर भारत की बेटियां, चाहे रही वो माँ बहन भले रही हो चेंटियां।”तो अनामिका संजय अग्रवाल ने भी अपने भाव व्यक्त किए ,“बेटियों ने बता दिया, ये सारा जग हमारा है।”डॉ. नागेंद्र त्रिपाठी ने कहा ,“बेटा-बेटी में भेद न कर, बेटी बेटे से नहीं है कम।”वहीं किरन ओझा की रचना ने सबका मन मोह लिया ,“अरे कौन कह रहा अबला है नारी, हर क्षेत्र में परचम लहराती है।”बालकवि माधवेन्द्र प्रताप सिंह ‘प्रत्यूष’ ने जोश के साथ कहा ,“बेटी रण में लड़े, बेटी नभ में चढ़े, बेटी सृष्टि प्रदाता, बेटी सृष्टि गढ़े।”नीता माथुर ‘नीत’ ने बेटियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा ,“इतिहास रच दिया बेटियों ने, जीता विश्व कप, देश का झंडा लहरा दिया बेटियों ने।”और डॉ. आशिष कुमारी कान्ता ने कहा ,“घर की चारदीवारी, चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं अब बेटियां।”
गूगल मीट पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अनेक राज्यों — छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड आदि से कवियों ने सहभागिता की। सभी रचनाओं में एक स्वर था — “बेटियां अब समाज की प्रेरणा हैं, कमजोरी नहीं शक्ति का प्रतीक हैं।” अंत में संस्थापक सुनीता जौहरी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियां राष्ट्र का गौरव हैं, उनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह काव्य गोष्ठी सफलता पूर्वक संपन्न हुई।
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