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संवेदनशीलता और न्याय का उदाहरण : मुस्कान बालिका गृह, इटारसी में आश्रय से गृहस्थ जीवन तक की प्रेरक यात्रा


संवेदनशीलता और न्याय का उदाहरण :  मुस्कान बालिका गृह, इटारसी में आश्रय से गृहस्थ जीवन तक की प्रेरक यात्रा 

इटारसी । कम उम्र में गर्भवती हुई एक बालिका को, परिस्थितिवश बाल कल्याण समिति हरदा (म.प्र.) के आदेश से मुस्कान बालिका गृह, इटारसी में सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया।

संस्था के संचालक मनीष ठाकुर द्वारा तात्कालिक एस.डी.एम. श्री प्रतीक राव के माध्यम से मेडिकल बोर्ड इटारसी का गठन कराया गया, जिसके निर्देशन में श्यामा प्रसाद मुखर्जी हॉस्पिटल, इटारसी में उक्त बालिका की सुरक्षित डिलीवरी कराई गई, जिसमें उसे बालक रत्न की प्राप्ति हुई।

यह मामला विधिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील था और न्यायालय में भी विचाराधीन रहा, जहाँ सभी आवश्यक विधिक औपचारिकताओं का पालन किया गया।

मुस्कान संस्था की देखरेख में बालिका एवं बालक दोनों को डेढ़ वर्ष तक संपूर्ण पोषण, स्वास्थ्य-सुरक्षा और परामर्श प्रदान किया गया। संस्था ने उनके सर्वांगीण विकास और पुनर्वास हेतु लगातार सहयोग दिया।

अब, जब उक्त बालिका की आयु 18 वर्ष से अधिक हो चुकी है, बाल कल्याण समिति हरदा के विधिवत आदेशानुसार उसे अपने पति व बालक के साथ ससम्मान विदा किया गया।

यह घटना समाज में बाल संरक्षण प्रणाली, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक पुनर्वास के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करती है — जहाँ संवेदना और कानून दोनों ने मिलकर एक जीवन को नई दिशा दी।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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