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साहित्यिक संस्था 'फुरसत में' ने मनाया बाल दिवस


 

साहित्यिक संस्था 'फुरसत में' ने मनाया बाल दिवस 

जमशेदपुर ।  नगर जमशेदपुर की वरिष्ठ महिला साहित्यकारों की संस्था फुरसत में ने 14.नवंबर को बाल दिवस पर एक  आनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। बाल दिवस पर बच्चो के मनोवैज्ञानिक विकास और जीवन शैली पर परिचर्चा  बाद सदस्यों ने अपनी रचनाएं सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता  करते हुए पद्मा मिश्र ने कुछ बाल गीतों से शुरुआत की तो लगा जैसे बचपन एक बार फिर उम्र के मध्यम पडाव पर साकार हो गया हो।बाल दिवस पर विशेष 

सो जा ,मेरे स्वप्न सलोने !

काली आँखों में सुरभित हों 

सुख के सारे  स्वप्न सलोने ,


निंदिया रानी की नगरी से 

 लाना सारे खेल -खिलौने 

 नील गगन से जगमग उतरें -

 चन्दा ,तारों के मृग छौने-

 फूल बाग़ में सोन चिरैया ,

 गीत सुहाने गाती -

 दूर देश से प्यारी परियां ,

तुझे सुलाने आतीं --

मथुरा से शामिल इंदिरा पाण्डेय ने कुशल मंच संचालन करते हुए कहा-बचचों का दिन तो हर साल आता है लेकिन बचपन की वो बेफिक्री कहां से लाएं?

 वरिष्ठ कवयित्री  सुधा अग्रवाल ने बचपन को याद करते हुए अपनी कविता पढी

ना कोई गम ना कोई जख्म

,मस्तमौला तू था बचपन। 

कब दोबारा मिलेगा बचपन

, उन्मादित उल्लसित बचपन ।

शृंखला  को आगे बढाते हुए सुस्मिता मिश्रा की रचना सभी को बचपन के सुनहरे दिनों में लौटा ले गई। 

कभी मैदानों में दौड लगाते,

कभी बालू से घर बनाते।

कभी मिट्टी में कभी गिट्टी में

,कभी गुडियों संग कभी पुडियों संग

 खेल खेलते बचपन में।

अगली रचना थी पुणे से जुडी कवयित्री किरण सिन्हा

 की-

मां की लोरी के संग सोना

चांद सितारों वाले दिन 

आंचल पकड़े मां के खाना 

ममता भरे वो न्यारे दिन 

मुझको सारे वो प्यारे दिन...!

इस आयोजन में संस्था की संरक्षक   आनंद बाला शर्मा, डा सरित किशोरी श्रीवास्तव, छाया प्रसाद, डा मीनाक्षी  कर्ण, डा मनीला कुमारी  ,आरती श्रीवास्तव, माधुरी मिश्र, सरिता सिंह,अनीता निधि,डा उमा सिंह,रेणुबाला मिश्र आदि सदस्य भी शामिल थीं।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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