“स्मृति-शेष” प्रो राम दरश मिश्र पद्मश्री पर केंद्रित यादगार लम्हे आयोजित
(15 अगस्त 1924 - 31 अक्टूबर 2025) पर केंद्रित
नोएडा । पेड़ों की छाँव तले फाउंडेशन के तत्वावधान में 123 वीं राष्ट्रीय साहित्यिक मासिक गोष्ठी आज यादगार लम्हे’ शीर्षक से आयोजित की गई । “स्मृति-शेष” प्रो राम दरश मिश्र पद्मश्री ( 15 अगस्त 1924 - 31 अक्टूबर 2025) पर केंद्रित इस गोष्ठी में ‘श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले साहित्यकारों में प्रमुख रूप से मिश्र जी की साहित्यिक बेटी आरती स्मित उनके शिष्य डॉ जसवीर त्यागी शामिल हुए । गोष्ठी में प्रो राम दरश मिश्र के सनिध्य को प्राप्त कर करने वाली कवयित्री डॉ भावना शुक्ल एवं ओडिसा से हिन्दी प्रोफेसर डॉ. मंजुश्री वेदुला, मीडिया विशेषज्ञ सुशील भारती सहित प्रयागराज से शायर सुशांत चट्टोपाध्याय ‘सफ़ीर’ आदि ने क्रमवार अपनी यादों को भावपूर्ण गमगीन शब्दों के साथ साझा किया तथा श्रद्धांजलि अर्पित की । इस दौरान मिश्र जी कि कविताओं और गजल का पाठ भी हुआ संचालन वरिष्ठ साहित्यकार अवधेश सिंह ने उनसे से जुड़े अनुभव संस्मरण के साथ सफलतापूर्वक किया ।
आन लाइन माध्यम से आयोजित गोष्ठी में दिल्ली से जुड़ीं साहित्यकार डॉ आरती स्मित ने अश्रूपूरित भावुकता भरे शब्दों से अपने संस्मरण को साझा करते हुए कहा कि पहली मुलाकात मे ही मुझे मिश्र जी ने अपनी “प्यारी बेटी” के सम्बोधन से मुझे बेटी का मान सम्मान दिया जबकि मै उन्हे हमेशा से ही बाबू जी कहती रही, साहित्यकार के रूप में साहित्य अकादेमी , सरस्वती तथा साहित्य के लिए पद्मश्री आदि अलंकरण से विभूषित होने के बावजूद बाबू जी में अंश मात्र का भी दिखावा या असहजता का आभाष नहीं था । सौ वर्ष पूरे होने का शताब्दी समारोह में उनकी सक्रियता मेल मिलाप समरसता और प्रियता को एक धरोहर के रूप में समझना चाहिए । वहीं चंडीगढ़ से शामिल शिष्य जसवीर त्यागी ने कहा कि दादा ने साहित्य की हर विधा में प्रचुरता से लिखा है इसलिए साहित्य के विद्यार्थी के लिए डॉ प्रोफेसर राम दरश मिश्र एक सम्पूर्ण पाठ्यक्रम से कम नहीं हैं ।
मीडिया विशेषज्ञ एवं मारवाह स्टूडियोज नोएडा के मीडिया निदेशक सुशील भारती ने कहा कि जब वे लाइफ टाइम एचईवमेंट अलंकरण 2024 को समर्पण हेतु डॉ मिश्र के निवास पहुंचे तब बड़ी उम्र और अस्वस्थता के बावजूद उनकी सजगता और उनके दैवीय औरा को उन्होंने महसूस किया था और उनसे जो वार्ता उन्होंने की उससे उनको बहुत ही प्रेरणा मिली । मंच का संचालन कर रहे संयोजक कवि अवधेश सिंह ने अपने एक दशक पुराने संबंधों के दौरान डॉ मिश्र जी से संबंधित प्रसंगों को याद किया और कहा कि प्रोफेसर राम दरश मिश्र जी शतायु रहे इसलिए उनको शताब्दी के साहित्यकार के रूप में याद किया जाएगा । यह कभी देखने को नहीं मिला जबकि कोई लेखक अपने शताब्दी समारोह में स्वयं ही मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता रखे ।
डॉ भावना शुक्ल ने अपने संस्मरण में डॉ मिश्र जी की विद्वता और उनके प्रेम सहजता को याद किया और कई रोचक बातें बताईं । इस दौरान प्रयागराज से शामिल शायर सुशांत चट्टोपाध्याय ‘सफ़ीर’ ने डॉ मिश्र जी द्वारा लिखित गजल का पाठ किया और ओडिसा की हिन्दी प्रोफेसर डॉ. मंजुश्री वेदुला ने मिश्र जी द्वारा लिखित कविता “सड़क” का वाचन किया । लगभग 90 मिनट तक देर शाम तक चली इस स्मृति सभा को दूर दूर तक साहित्य साधकों ने देखा और सुना ।
रिपोर्ट – अवधेश सिंह 9450213555
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