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शहर की कवित्रियों ने किया रचनापाठ : सृजनकरणी सबसे बढ़कर, नारियां जग बनाती बेहतर


 

शहर की कवित्रियों ने किया रचनापाठ : सृजनकरणी सबसे बढ़कर, नारियां जग बनाती बेहतर

इंदौर। शहर की साहित्यिक प्रतिभाओं और कला का एक अद्भुत संगम हाल ही में वामा साहित्य मंच और कैनरीज़ फाइन आर्ट गैरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। वरिष्ठ चित्रकार योगेंद्र सेठी की चित्र प्रदर्शनी 'अनवरत' के रंगों भरे चित्रों के बीच, शहर की आठ चुनिंदा लेखिकाओं ने "रंगों के आकाश में स्त्री की उड़ान" विषय पर अपनी भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया।

इस विशेष कार्यक्रम में वाणी जोशी, उषा गुप्ता, अनिता जोशी, किसलय पंचोली, सपना सी.पी. साहू, प्रतिभा जैन और रश्मि चौधरी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रंगों भरे चित्रों के बीच भाव भरी कविताएं

कार्यक्रम की शुरुआत वाणी जोशी ने तरन्नुम में कविता सुनाकर की, जिसमें उन्होंने स्त्री के आत्मविश्वास और परिवार के प्रति प्रेम दोनों को अभिव्यक्ति दी। उषा गुप्ता ने अपनी कविता 'बदलते रंग, नारी के संग' में नारी के हर रंग को भावुकता से अभिव्यक्त किया, यह कहते हुए कि: "शांति का सफेद रंग, इंद्रधनुष का हर रंग हम ही होते हैं इन्हीं रगों के साए में।"

अनिता जोशी ने 'मां ने बताया' शीर्षक से एक मार्मिक कविता सुनाई, जिसमें बचपन के दिनों को याद किया गया: "बचपन में मैंने, अपना एक एक संसार, बसाया था, घर के कोने में रंग-बिरंगा एक घर बनाया था, मैं उसे देख मुस्कुराई थी, कुछ सोच आंखें उनकी डबडबाई थी।"

उड़ती पतंग और स्वप्निल दुनिया

किसलय पंचोली ने यथार्थपरक और मार्मिक कविता प्रस्तुत की, जिसमें एक बेटी की मुस्कुराती पतंग को देखकर माँ की खुशी को दर्शाया गया: "मां आसमान सबका है यह सबक मैंने आपसी से ही सीखा है, पहली हो गई निहाल, निहार कर नीले आकाश में, बेटी की गाती मुस्कुराती पतंग।"

सपना सी.पी. साहू ने अपनी रचना में स्त्री की सहनशीलता और विपरीत परिस्थितियों के अनुरूप चलने के गुण को रेखांकित किया, "सृजनकरणी सबसे बढ़कर नारियां जग बनाती बेहतर, सह लेती सब पीड़ा, अभाव, नहीं पालती बदले का भाव।" प्रतिभा जैन ने अपनी कविता में स्वयं को नीला अंबर बताते हुए नारी के त्याग और सबको पूर्ण करने की भावना को व्यक्त किया: "नीला अंबर हूं, सबकी ख्वाहिशों को पूर्ण करने में सहायक हूं, स्वयं सपनों को दबाकर रखती मैं नीला, हलाहल रोज पीती हूं, पांच तत्वों के रंगों से बनी हूं।"

अंत में, रश्मि चौधरी ने 'स्वप्निल दुनिया' विषय पर मार्मिक कविता पढ़ी, जिसमें जीवन के लाल गुलाबी ख्वाबों का जिक्र था: "है स्वप्निल दुनिया रंग-बिरंगी, देखो खिल खिल जाती हैं, जाने हम सब लाल गुलाबी ख्वाब कहां से लाती हैं।"

इस अवसर पर, कैनरीज़ आर्ट गैलरी के सौरभ घाटे को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शहर के कई चुनिंदा कलाकार-साहित्यकार मौजूद थे, जिन्होंने कला और साहित्य के इस मेल की सराहना की।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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