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400 मुनिराजो की आहारचर्या में उमड़े श्रद्धालु, हुए केवल्य ज्ञान के संस्कार


 

आहार, भय, मैथुन, परिग्रह चार लेश्याएँ और आर्त-रौद्र ध्यान पाप आश्रव के कारण हैं-

खानपान बिगड़ेगा तो खानदान बिगड़ जायेगा-

खाते में बोलना नहीं, पढ़ते में खाना नहीं और जूता पहनकर पढ़ना - खाना नहीं-

 - मुनि सुव्रतसागर महाराज


400 मुनिराजो की आहारचर्या में उमड़े श्रद्धालु, हुए केवल्य ज्ञान के संस्कार

सम्भोशरण की भव्य रचना में खिरी भगवान की दिव्य देशना।

चतुर्दशी को होगा भगवान का मोक्ष, विश्व शांति महायज्ञ के बाद नव गजरथ महा महोत्सव।

 ललितपुर। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के पांचवे दिन वात्सल्य मूर्ति मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में शुक्रवार को सुबह मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया। अयोध्या नगरी में अभिषेक शांतिधारा, तप कल्याणक की पूजन-विधान के बाद 400 मुनिराजो की आहारचर्या सम्पन्न हुई जिसमें भारी श्रद्धालु उमड़े।मंगलाचरण ब्रह्मचारिणी रजनी दीदी बबीना ने किया। मुनि श्री का पाद पृच्छालन एवं शास्त्र भेंट डॉ. राजेंद्र जैन घुवारा एवं अरविन्द जैन ललितपुर ने किया। बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा आहार, भय, मैथुन, परिग्रह चार लेश्याएँ और आर्त-रौद्र ध्यान पाप आश्रव के कारण हैं। जब चाहे जो चाहे जहाँ चाहे खाना नहीं, इसका विवेक रखना बहुत जरुरी है क्योंकि खानपान बिगड़ेगा तो खानदान बिगड़ जायेगा। खाते में बोलना नहीं, पढ़ते में खाना नहीं और जूता पहनकर पढ़ना - खाना नहीं। मुनि श्री ने श्रावक के 7 के गुण और नवधा भक्ति के 9 अंग एवं 16 प्रकार की शुद्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दोपहर की बेला में केवल्य ज्ञान कल्याणक के संस्कार किये गये जिसमें भारी श्रद्धालु उमड़े। नयनोन्मीलन, सूरि मन्त्र विधि, प्राण प्रतिष्ठा, इस मौके पर सम्भोशरण का उद्घाटन अखिलेश जैन ग़दयाना परिवार एवं मंगल आरती सिंघई प्रेमचंद डबरा परिवार ने की। सम्भोशरण में जिनेन्द्र भगवान की दिव्य देशना खिरी। एवं केवल्य ज्ञान की पूजन की गयी। मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा इस पावन भूमि पांच वार स्थापना निक्षेप के सम्भोशरण लग चुके हैं। निश्चित ही यहाँ चतुर्थ काल में साक्षात् तीर्थंकर भगवान का सम्भोशरण लगा होगा। राग और संसार के भोग बिलासिता त्यागकर वैराग्य की ओर बढ़ना ही सम्भोशरण की विशेषता है जहाँ शेर और गाय भी एक साथ पानी पीते हैं। सायं काल महाआरती श्रावकश्रेष्ठी सुनीता ऋषभ जैन ललितपुर परिवार ने की। रात्रि में क्षेत्र प्रबंध समिति के द्वारा प्रमुख पात्रों एवं आगंतुक अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बा. ब्र. अंशु भैया कोलारस, रोहित भैया दमोह, संजय भैया इंदौर, पारस भैया, पं. विनोद कुमार शास्त्री, राजकुमार चकरपुर, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, संयुक्त मंत्री विकास भंडारी, उपमंत्री आकाश चौधरी, ऑडिटर पंकज भंडारी, अजय जैन, प्रदीप कुमार, तिलक जैन, आशीष कुमार, दानाशाह, अनिल, अटल, धर्मेंद्र नयाखेड़ा, अमित जैन, सौरभ कड़ेसरा, अरविन्द कुमार, अचिन जैन  ईलू, गौरव विरधा, सौरभ पवैया, आदेश जैन, शुभम मोदी, अक्षत पवा सहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने - कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना ने बताया पंचकल्याणक कार्यक्रम के अंतिम दिन शनिवार चतुर्दशी 17 जनवरी को सुबह मूलनायक भगवान का अभिषेक शातिधारा के बाद मोक्ष कल्याणक के संस्कार किये जायेंगे, जिसमें 400 जिनबिम्ब की सूरि मन्त्र के साथ प्रतिष्ठा पूर्ण होगी जिन्हें वर्तमान तीस चौबीसी मंदिर में विराजमान किया जायेगा। एवं नव गजरथ महा महोत्सव का कार्यक्रम विशेष दर्शनीय होगा। आभार व्यक्त मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी एवं उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने संयुक्त रूप से किया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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