उत्तर - दक्षिण के बीच सेतु काशी - तमिल संगमम्
- सत्य प्रकाश
देश की सांस्कृतिक एकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले के लिए आरंभ केंद्र सरकार का काशी - तमिल संगमम् लोगों के मन पर अपनी अमिट छाप छोडने में सफल रहा है। काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंध का यह जुड़ाव केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि एक गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एक सूत्र में बांध रखा है। ऐसे आदान-प्रदान भारत की साझा विरासत को पुष्ट करते हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को और गहरा करते हैं।
काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन संबंधों और रिश्तों को पुन जीवित करता यह आयोजन दो दिसंबर 2025 से शुरू हुआ और 30 दिसंबर को संपन्न हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों के हजारों लोगों ने एक दूसरे के क्षेत्र में यात्रायें की और विचारों का आदान प्रदान किया। काशी - तमिल संगमम् के यह चौथा आयोजन "तमिल करकलाम - आइए तमिल सीखें" विषय पर आधारित रहा। इसका उद्देश्य तमिल भाषा को बढ़ावा देना और काशी तथा तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना था। इस आयोजन में प्रतिनिधिमंडल वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या गये और विशेष संवाद, संगोष्ठियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा स्थानीय व्यंजनों, हस्तशिल्प और विरासत का अनुभव किया।
प्रतिनिधिमंडल ने वाराणसी में, प्रमुख तमिल विरासत स्थलों महाकवि सुब्रमण्यम भारतीयार का पैतृक घर, केदार घाट, कांची मठ, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य शैक्षणिक, भाषायी और साहित्यिक आदान-प्रदान के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में भी गये।
इस वर्ष के आयोजन में ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान भी शामिल है। प्राचीन मार्गों का अनुसरण करने और तमिलनाडु को ऐतिहासिक रूप से काशी से जोड़ने वाला यह अभियान तेनकासी से शुरू होकर काशी में समाप्त हुआ। यह अभियान पांडियन शासक श्री आदि वीर पराक्रम पांडियन की यात्रा से प्रेरित है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति में एकता को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु से काशी की यात्रा की और भगवान शिव के मंदिर की स्थापना की, साथ ही नगर का नाम बदलकर तेनकासी (दक्षिण काशी) रख दिया, जो दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।
प्रतिनिधिमंडल में छात्रों, शिक्षकों, लेखकों, पत्रकारों, किसानों, पेशेवरों, कारीगरों, महिला समूहों और आध्यात्मिक विद्वानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1400 से अधिक प्रतिनिधियों ने विभिन्न खंडों में भाग लिया। इन्होंने प्रयागराज में नदी संगम और अयोध्या के महत्वपूर्ण स्थलों का भी भ्रमण किया,जिनमें नवनिर्मित श्री राम मंदिर भी शामिल है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय एकता पहल 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण से प्रेरित पहले काशी तमिल संगमम् का आयोजन वर्ष 2022 में हुआ। ऐसे आयोजन सामाजिक सांस्कृतिक रिश्तों को प्रगाढ करने के साथ आर्थिक व्यापारिक संबंधों के आधार भी बनते हैं। प्रतिभागियों को एक दूसरे की आवश्यकताओं को समझने में सहायता मिलती है और वे एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं।
- सत्य प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार
नयी दिल्ली
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