तीन दिवसीय सिन्धी लोक साहित्य कार्यशाला हुई प्रारंभ
खंडवा से सिंधी साहित्यकार निर्मल मंगवानी भी हुए शामिल
खंडवा। मध्यप्रदेश सिन्धी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा सिन्धी लोक साहित्य के प्रति युवा रचनाकारों एवं कलाकारों को प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय सिन्धी लोक साहित्य कार्यशाला का शुभारंभ वरिष्ठ सिन्धी साहित्यकार डॉ. जेठो लालवानी, डा. कमला गोकलानी, डा. नादिया मसन्द, डा. तमन्ना लालवानी, की मौजूदगी में उज्जैन रिंग रोड स्थित होटल पार्क पैलेस के सभागार में हुआ। कार्यशाला में खंडवा से सिंधी साहित्यकार निर्मल मंगवानी भी शामिल हुए है। अकादमी के निदेशक राजेश कुमार वाधवानी ने बताया कि वरुणावतार श्री झूलेलाल जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के बाद सिन्धी मातृभाषा में सरस्वती वंदना के साथ आरम्भ हुई कार्यशाला के पहले दिन प्रथम सत्र में अहमदाबाद से आए वरिष्ठ सिन्धी साहित्यकार डॉ. जेठो लालवानी ने लोक साहित्य के अर्थ, इसके स्वरूप तथा विभिन्न अंगों पर प्रकाश डालते हुए लोक साहित्य व लोक संस्कृति के संबंध को विस्तार से स्पष्ट किया और बताया कि सभ्यता और संस्कृति को देखे तो आज के समय संस्कृति बदल सकती है किन्तु सभ्यता नहीं। क्योंकि सभ्यता हमारा जीवन है। संस्कृति परिवर्तनशील होती है, समय-समय पर विभिन्न प्रभावों के चलते संस्कृति में जो परिवर्तन होते हैं उसके कारण आचार -विचार, खान-पान, वेशभूषा आदि में भी परिवर्तन होते हैं। द्वितीय सत्र में अजमेर से पधारी वरिष्ठ सिन्धी साहित्यकार डॉ. कमला गोकलानी ने सिन्धी लोक कथा, कहानियों पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि एकल परिवारों के चलते वर्तमान में हमारे परिवारों से लोक कथा- कहानियां विलुप्त हो रही हैं क्योंकि पूर्व समय में संयुक्त परिवारों में बुजुर्ग दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों को इन दंत कथा, कहानियों के माध्यम से कुछ सीख देते थे। तीसरे सत्र में अहमदाबाद से पधारी डॉ. तमन्ना लालवानी ने सिन्धी लोक गाथाओं की जानकारी दी, उन्होंने शाह लतीफ भिटाई की सात सिन्धी नायिकाओं का वर्णन करते हुए कहा कि शाह ने अपनी गाथाओं की नायिकाओं को अत्यंत सम्मान दिया है, उन्होंने अपनी लोक नायिकाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के साथ ही महिलाओं की उच्च धार्मिक, आध्यात्मिक व सामाजिक स्थिति को तो उजागती किया ही है साथ ही उनकी देशभक्ति को भी सर्वोच्च स्थान पर रखा। प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में पुनः डॉ. जेठो लालवानी ने सिन्धी भक्ति की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए इसके संरक्षण की बात कही। राष्ट्रीय सिंधी समाज प्रदेश प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि कार्यशाला में भगवान बाबाणी, सुरेद्र लच्छवानी, सुरेश पारवानी, संजय वर्मा, नमोश तलरेजा, हर्षा मूलचंदानी, जया बेलानी, महेश मूलचंदानी, सुनील बुधवानी, निर्मल मंगवानी, भावना ठाकरानी, रश्मि रामाणी, निर्मला राजानी, सागर उदासी, अजय गुरु, प्रकाश दोडानी, अजय मोहन, विवेक तलरेजा, द्रोपदी चंदनानी, सिमरन सुखीजा, चिमन लखानी, ईश्वरचंद्र चंचलानी (उज्जैन गीत लेखक), मुरली वासवानी (फिल्म पटकथा, गीत लेखक) भारती तोलानी, सिमरन संतवानी, राजेश कोटवानी, अजय मोहन आदि कुल 30 युवा तथा वरिष्ठ साहित्यकार, कलाकार इंदौर, उज्जैन, भोपाल, खंडवा, ग्वालियर और सतना से शामिल हुए हैं।
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