स्वामी विवेकानंद जयंती पर शासकीय कन्या महाविद्यालय इटारसी में सेवा सप्ताह के अंतर्गत संवाद कार्यक्रम आयोजित
इटारसी । स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में शासकीय कन्या महाविद्यालय, इटारसी में 6 जनवरी से 12 जनवरी तक सेवा सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में यूथ रेड क्रॉस के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन विषय पर एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.एस. मेहरा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं के लिए आत्मविश्वास और आत्मबल का प्रतीक है। उनका यह संदेश उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उनका दर्शन चरित्र निर्माण, राष्ट्र सेवा और मानवता के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. हरप्रीत रंधावा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का चिंतन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और वैचारिक परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया।श्री रविंद्र चौरसिया ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन सामाजिक समरसता, सेवा भावना और मानव मूल्यों को सुदृढ़ करता है। उनका यह विचार दरिद्र नारायण की सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है आज के समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. शिरीष परसाई ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन आध्यात्मिकता और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। वे मानते थे कि विज्ञान बाहरी सत्य की खोज है और आध्यात्मिकता आंतरिक सत्य की। यह संतुलन ही युवाओं को जागरूक, आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिर्माता बनने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी नीतू अहिरवार ने आभार व्यक्त करते हुए देते बताया कि सेवा सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक, सामाजिक एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे छात्राओं में सेवा, नेतृत्व एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो सके। कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वामी विवेकानंद के विचारों“तुम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हो को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रेरणादायी संदेश के साथ किया गया। कार्यक्रम में समस्त प्राध्यापक एवं अधिक संख्या में छात्राएं उपस्थित थी।
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