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काव्य : मेरे देश की नारी - पद्मा मिश्रा , जमशेदपुर


 काव्य : 

मेरे देश की नारी


समय के भाल पर अंकित है,जिनकी ही कहानी,

शिखा बन रोशनी की जलती रही है जिंदगानी,

वो नारी आग बनजागी है,भड़की है ज्यों चिंगारी .

डरो अब म्रत्यु के आँगन में होली खेलने वालो,

डरो  अब वासनाओं के ,कुटिल उन्माद के ब्यालों,

डरो  अब,क्रांति बन जागी है,मेरे देश की नारी,

प्रलय की आँधियों छूना नहीं वो ज्वलित चिंगारी,

नहीं वो लाज का घूँघट ,नहीं वो सिसकती बिटिया,

नहीं वो कोमलांगी डाल सी,सौंदर्य प्रतिमा है,

नहीं वो वेदना की मूर्ति बन जीवंत करुणा है,

प्रबल संघर्ष में जेता बनी,रण में नहीं हारी,

विधाता ने जिसे मातृत्व की गरिमा में ढालाथा,

उसी मातृत्व को करके कलंकित राख करडाला ,

 जिसे सम्मान देकर प्रेम का आँगन सजाना था,

उसे दे दी चिता की सेज,जला प्रतिकार की ज्वाला,

मगर बदले समय केक्षितिज पर घिरती घटाएं हैं,

नहीं अबला हैं वो, बस शक्ति हैं, वीरांगनाएँ हैं,

जलाये ज्ञान की ज्योति सजग असिधार जागी है,

लिए संकल्प में दृढ़ता ,प्रबल जल-धार जगी है,

 सृजनकर्ता है वो, देगी चुनौती  खुद विधाता को,

वो माँ है त्याग,करुना, स्नेह के प्रतिमान गढ़ देगी,

---पद्मा मिश्रा , जमशेदपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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