प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल की काव्य गोष्ठी संपन्न
भोपाल । राजधानी की चर्चित संस्था प्रभात साहित्य परिषद द्वारा "बहार आने तक" विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में तथा वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल के मुख्य आतिथ्य में एवं वरिष्ठ साहित्यकार हीरालाल पारस के विशेष आतिथ्य में तथा वरिष्ठ शायर डॉ. मोहम्मद आज़म के संचालन में किया गया.
इस अवसर पर पिछली काव्य गोष्ठी की सर्वश्रेष्ठ चुनी गई ग़ज़ल के लिये अजीम असर को एवं सर्वश्रेष्ठ रचना के लिये श्रीमती शोभा जोशी "साक्षी" को सरस्वती प्रभा सम्मान से अलंकृत किया गया.
तदुपरांत सरस्वती वंदना के बाद गोष्ठी के आरम्भ में एस एन शर्मा ने पढ़ा जग में बहार आने तक, तन मन से काम करो वहीं प्रदीप कश्यप ने पढ़ा बाग सूना बहार आने तक. हर शजर पे निखार आने तक. वहीं हीरालाल पारस ने पढ़ा हवा थककर भी, चलना चुनती है बहार आने तक. वहीं महेश प्रसाद सिंह ने पढ़ा टेसू ग़र रतनार न होता. रंगों का व्यापार न होता. बागन बीच बहार आने तक, कामन रति का प्यार न होता. वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा रुक भी जाओ करार आने तक. पतझरों में बहार आने तक. वहीं हरिओम सोनी ने पढ़ा फूल से पूछ आती है कैसे बहार, डाली पर करता है खिलने का इंतजार. बहार आने तक वहीं डॉ. आज़म ने पढ़ा चमन उजाड़ रहेगा निखार आने तक. कि आंधियां ही चलेंगी बहार आने तक. वहीं डॉ. अनिल शर्मा मयंक ने पढ़ा सम्भाले रखना डोर वतन की करार आने तक. अभी तो पतझड़ है न जाना बहार आने तक. वहीं विद्या श्रीवास्तव ने पढ़ा आप तो आये नहीं बहार आने तक, हमने खिजां में ही गुजारा कर लिया. इनके अलावा विरोनिका पीटर, राजेन्द्र रमण, दिनेश मोहन श्रीवास्तव,आदि ने भाग लिया.
अंत में अशोक व्यग्र ने सभी का आभार व्यक्त किया.
संस्थापक
रमेश नन्द
Mo.9893856262
.jpg)
