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काव्य : दोष किसका ? - श्रीमती अंजना दिलीप दास , बसना छत्तीसगढ़


 काव्य : 

 दोष किसका ?


उमर से पहले बड़ी हुई वह ,

लक्ष्मी नाम की छोटी सी गुड़िया ।

घर घर का काम कर पढ़ाई करती ,

जब उमर थी खेलने की गुड्डे गुड़िया ।


कैसी निष्ठुर ही थी वह मां जो ,

दूध पीती बेटी को छोड़ गई ।

ममता का गला घोंटकर वह ,

पराए पुरुष से नाता जोड़ गई ।


क्या ही दोष उस मासूम का ,

जो उस पर सभी पाबंदियां है ।

अपनी मेहनत से पुस्तकें लेती ,

फिर उस पर उठती क्यों उंगलियां है ।


कभी मायूस होती कभी उदास  ,

जीने की क्या बचेगी उसमें आस ।

जब अपने ही इस बेचारी को सताएंगे, 

कुलक्षणी की बेटी कुलक्षणी कह कर पुकारेंगे ।


लक्ष्मी के चेहरे पर मुस्कान,

बहुत कम ही अब खिलता है।

अपना आसमान ढूंढने जब निकले,

तीखे कटाक्षों का तीर कमान मिलता है।


-श्रीमती अंजना दिलीप दास 

बसना छत्तीसगढ़

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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