काव्य :
दिल के आईने में तुम
जिंदगी एक दिन हैरान होकर पूछे,
कौन चाहता है सबसे ज्यादा तुझे,
कौन रखता है तुझे दिल के दाईने में ,
मुस्कुरा कर दिल ने कहा ,
तुम ही रहते हो दिल के आईने में।
शरमा कर जिंदगी ने तुझसे किया सवाल ,
मचने लगा दिल में हल्का-हल्का बवाल,
धड़कने उठाने लगी रक्त में उबाल,
कौन चाहता है तुझे असल मायने में ,
मुस्कुरा कर दिल ने कहा,
तुम ही रहते हो दिल के आईने में।
स्तब्ध रह जाता है रात्रि का मंजर,
दिल में उतरने लगते हैं सैकड़ों खंजर,
कुछ पल के लिए हो जाता है मन बंजर ,
कौन झूलाता है तुझे प्रेम पालने में,
मुस्कुरा कर दिल ने कहा ,
तुम ही हो मेरे दिल के आईने में।
उठता दिल में जब तुम तन्हाइयों का तूफान ,
लगता है जिंदगी बन गई श्मशान,
मन हो जाता है बहुत ही परेशान,
कौन कोशिश करता तुझे, मुझ में ढालने में ,
मुस्कुरा कर कहता है दिल,
तुम ही हो मेरे दिल के आईने में।।
- नीता गुप्ता ,
रायपुर छत्तीसगढ़
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