काव्य :
ग़ज़ल
बीमारी नहीं है
रात अंधियारी नहीं है।
कोई दुखियारी नहीं है।
प्यार बीमारी नहीं है ।
कोई लाचारी नहीं है।
मुझ प नाराजी न रखना।
ये समझदारी नहीं है।
जान भी तुझ पर लुटा दूं।
इसमें दुश्वारी नहीं है।
वक्त पर हर काम होता।
देख सरकारी नहीं है।
हैसियत से पार लड़ना।
तो समझदारी नहीं है।
बात हक की बोलता हूं।
ये तरफदारी नहीं है।
हो रहे हैं कुछ धमाके।
यह तो बमबारी नहीं है।
- आर एस माथुर, इंदौर
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