ad

मुश्किल वक़्त में विवेकशील रहकर उचित और दूरगामी रिश्तें कैसे लिये जाएं यह हमें लौह पुरुष सरदार पटेल के जीवन से सीखना चाहिए‌ - डॉ.सुजाता मिश्र


 

मुश्किल वक़्त में विवेकशील रहकर उचित और दूरगामी रिश्तें कैसे लिये जाएं यह हमें लौह पुरुष सरदार पटेल के जीवन से सीखना चाहिए‌ - डॉ.सुजाता मिश्र 

सूरत ।  वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय, सूरत के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा “आधुनिक भारत में सरदार पटेल के विचारों की प्रासंगिकता” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यापनरत डॉ.सुजाता मिश्र ने बतौर विषय विशेषज्ञ अपने वक्तव्य में कहा कि “यह सरदार पटेल जी की ही दूरदृष्टि थी कि आज विभाजन और आज़ादी के लगभग  उन्नासी 79 वर्ष बाद भारत दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देशों में गर्व से शामिल है .... जब्कि मज़हब के नाम पर अलग हुए पाकिस्तान और बंगाल का आज भी वही हाल है जो विभाजन के दौरान था, वो आज भी उसी मोड पर फंसे हुए हैं , वही हिंसा, वही दंगा ,वही आतंकी हमला !जितने भी लोगों ने विभाजन की त्रासदी और उसके बाद भी पाकिस्तान के प्रति सहानभूति का भाव रखा उन्हें स्वयं विचार करना चाहिये कि आखिर क्यों भारत आज विश्व शक्ति बन चुका है और क्यों ये दोनों मुल्क आज भी बिखरे हुए हैं!और क्या मिला लोगों को मज़हब के नाम पर जिन्ना का साथ देकर! सरदार पटेल में  हम एक  राजनेता  ही नहीं बल्कि श्रेष्ठ मनुष्य होने के गुणों को इंगित करें ! मुश्किल वक़्त में सही निर्णय कैसे लिए जाते हैं यह सीखे, अपने निर्णयों पर तट्स्थ रहना सीखें , जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय तात्कालिक लाभ या सुख की इच्छा से न लेकर भविष्य को ध्यान में रखकर लें , यह उनका जीवन हमें सिखाता है ।“  

 संगोष्ठी में राष्ट्रनिर्माण, प्रशासनिक एकीकरण, सुशासन तथा समकालीन भारत की चुनौतियों के संदर्भ में सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों पर गंभीर एवं विश्लेषणात्मक विमर्श हुआ।

संगोष्ठी में प्रो. जनक सिंह मीणा, प्रो. गौरांग रामी,डॉ. हितेश पटेल, डॉ. सुजाता मिश्र गरिमामयी उपस्थिति रही, वक्ताओं ने सरदार पटेल के प्रशासनिक दृष्टिकोण, राष्ट्रीय एकता के संकल्प तथा आधुनिक शासन-प्रणाली में उनकी नीतिगत प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनके वक्तव्यों ने यह स्पष्ट किया कि पटेल का दृढ़, व्यावहारिक और राष्ट्रहित-केन्द्रित नेतृत्व आज भी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत है। इस गोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल सागर विश्वविद्यालय के मल्टीमिडिया रिसर्च सेंटर में कार्यरत माधव चंद्र समापन सत्र में अपने विचार रखते हुए कहा कि  सरादार पटेल के विचारों की प्रासंगिकता हमेशा रहेगी। 

कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. मधु एम. थवानी के मार्गदर्शन में किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. किशोरसिंह एन. चावड़ा का प्रेरणादायी मार्गदर्शन इस आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण रहा।

संगोष्ठी के सफल संचालन में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की आयोजन समिति ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें श्रीमती ममता मीणा, डॉ. स्वाति देसाई, डॉ. ममता भक्कड़ एवं डॉ. दीपिका गुप्ता शामिल रहीं। सभी संकाय सदस्यों के समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली रूप से संपन्न हुआ।

यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आधुनिक भारत में सरदार पटेल के विचारों की सतत प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए शैक्षणिक जगत को एक सार्थक मंच प्रदान करने में सफल रही।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post