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3 मार्च को ग्रहण से धुरेली एवं चल समारोह प्रभावित होगा


 

होली की अग्नि और राख: एक पवित्र परंपरा : भक्ति में शक्ति की जीत

 इस वर्ष कब चढ़ाई जाय होली की राख और गुलाल

3 मार्च को ग्रहण से धुरेली एवं चल समारोह प्रभावित होगा

भोपाल। होली का त्योहार रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन इसके पीछे एक गहरा अर्थ और महत्व भी है। होली की अग्नि और राख इस त्योहार के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देते है  । ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार  होलिका दहन से उत्पन्न होने वाली अग्नि, जिसे होलिका पंचाग्नी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद की विजय और दुष्ट राजा हिरण्यकश्यप के नाश का प्रतीक है। भक्त प्रहलाद द्वारा ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप सकारात्मक ऊर्जा  थी जो इस अग्नि में नहीं जली ,लेकिन नकारात्मक ऊर्जा राक्षसी प्रवृत्ति की होलिका जल गई ।यह अग्नि नकारात्मक ऊर्जा और शक्तियों को दूर करने का प्रतीक है। यह हमें जीवन में अच्छाई और सत्य की जीत का संदेश देती है।

पंडित गौतम के अनुसार होली की राख को भस्म कहा जाता है, जिसे शरीर पर लगाया जाता है। यह राख शुद्धिकरण और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है। यह राख त्वचा और शरीर को ठंडक प्रदान करती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करती है।

 यह पवित्र अग्नि सकारात्मक ऊर्जा से भरी होती है यह रसोई की अग्नि में भी परिवर्तित होती है और हवन  कुंड में भी प्रवेश कर जाती है यह चिता की अग्नि भी बन जाती है यह नई अग्नि अपने घर में लाकर पूजन करें । इस अग्नि से भोग प्रसाद बना करके अपने कुल देवता स्थान देवता आदि को अर्पित करें, । इस अग्नि से बनाए गए  भोजन प्रसाद से  पेट की अग्नि जठराग्नि  शांत होती है । यह अग्नि हम सभी में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करने वाली है।

ज्योतिष मठ संस्थान के आचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया कि सूतक एवं ग्रहण काल में इस वर्ष 3 मार्च को प्रातः 9:00 बजे से धूडेली रंग आदि नहीं करें, । ग्रहण काल में हमारे देवताओं को कष्ट रहेगा ऐसे समय में हम उत्सव मनाएं यह शुभता प्रदान नहीं करेगा । इस कारण 4 मार्च को  होलिका उत्सव, चल समारोह निकाला जाय , होली की भस्म ,,गुलाल ,रंग हमारे कुल देवताओं को ,मंदिर के देवताओं को, ग्राम देवताओं को, वस्तु देवताओं को अर्पित की जाती है । इसलिए सूतक ,ग्रहण काल में अर्पित नहीं करना चाहिए इस कारण दूसरे दिन होली उत्सव शुरू होगा यही शास्त्र सम्मत है

पंडित गौतम के अनुसार होली की अग्नि और राख का महत्व हमें जीवन में सकारात्मकता और शुद्धता को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। होली की अग्नि नव ऊर्जा का संचार करती है यह पहली अग्नि कहलाती है। इसी प्रकार होली की भस्म देवताओं के बाद माता-पिता परिवार जनों को लगाई जाती है। इसी भस्म से होली धूडेली खेलने की शुरुआत होती है पश्चात तरह-तरह के रंग गुलाल से होली खेली जाती है होली की राख को शरीर पर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और मानसिक शांति बढ़ती है। इसे घर के चारों ओर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।इस प्रकार, होली की अग्नि और राख हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देते हैं और हमें एक पवित्र और सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।।

  -  ज्योतिषाचार्य  पंडित विनोद गौतम 

 ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल 

 9827 322068

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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