काव्य :
ग़ज़ल
कुछ रस्ते ऐसे हैं जिन पर मोड़ नहीं आते
दुख ऐसे मिलते हैं जिनके तोड़ नहीं आते
आंसू पीकर दर्द हमारे भी ख़ुश होते हैं
कहते हैं सब दूर इन्हें क्यों छोड़ नहीं आते
हम दुख लाखों साथ लिए हैं पर ख़ुश रहते हैं
हम जैसे दुनिया में कई करोड़ नहीं आते
ख़ुशियाँ आप गिनो अपनी हम दुख भी नहीं गिनें
सरल ज़िंदगी हमें घटाने जोड़ नहीं आते
लालच या बहकावे हमको लुभा नहीं पाये
मान बिना सम्मान सभा में दौड़ नहीं आते
किशन कन्हैया माखन चोरी या कुरुक्षेत्र रहे
दुर्योधन की बातों में रणछोड़ नहीं आते
- किशन तिवारी भोपाल
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