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काव्य : खत्म हो रहे खून के रिश्ते -छगनलाल मुथा-सान्डेराव , मुम्बई


 

काव्य : 

खत्म हो रहे खून के रिश्ते


सुनो सुनो आज के नौजवान, कैसे चलेगा अब व्यवहार।

ख़त्म हो रहें रिश्ते ख़ून के,किसे कहेंगे अपना परिवार।

पांच सम्बन्ध खास खून के,आ गये समाप्ति की मशान।

बुआ मासी भाई बहन,और काका नाम का मिट रहा नामोनिशान।


दो बेटा एक बेटी तो मौसी का सम्बन्ध खत्म।

एक बेटा दो बेटी तो काका का सम्बन्ध खत्म।

एक बेटा एक बेटी तो मौसी काका का सम्बन्ध खत्म।

एक बेटा शून्य बेटी तो सब कुछ सम्बन्ध खत्म।

शून्य बेटा एक बेटी तो सब कुछ सम्बनध खत्म।

 

किसे कहेंगे भाई-भाभी,किसे कहेंगे काका-काकी।

किसे कहेंगे मामा-मामी,किसे कहेंगे मौसा-मौसी।

किसे कहेंगे जीजा-जीजी,किसे कहेंगे साला-साली।

कैसा अजब जमाना आया,मिट रही है घर की लाली।


कितना अकेला महसूस करेंगे बिन भाई और बहनों के।

किस भाई को बांँधेगी राखी या भाई बंँधवाएगा बहनों से।

कैसे जी बहलायेंगे बिन बच्चों के नाना-नानी जी।

किसे सुनायेंगे कहानी परियों की दादा-दादी जी।


कौन समझाए किसे समझायें सब पढ़े-लिखें होशियार हैं।

सही गलत जो भी हो रहा मुथा इसके हम सब जिम्मेदार हैं।

- कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव , मुम्बई

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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