काव्य :
ग़ज़ल
चैन कभी भी खोना मत
दुख में हरगिज रोना मत
सख्ती सारी सह लेना
बनना यार खिलोना मत
थामी है पतवार अगर
कश्ती यार डुबोना मत
मुल्क मुसीबत मेंहो जब
ढूंढो कोई कोना मत
जब हो जगने को बेला
ओढ़ के चादर सोना मत
- हमीद कानपुरी
अब्दुल हमीद इदरीसी
मीरपुर, कैण्ट, कानपुर-20800
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काव्य
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