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समीक्षा : (लतिका जाधव, पुणे) मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती काव्य रचनाओं का संग्रह है डॉ. पुष्पा गुजराथी का काव्य संग्रह - पुहुप


 

समीक्षा : (लतिका जाधव, पुणे)

मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती काव्य रचनाओं का  संग्रह है  डॉ. पुष्पा गुजराथी का काव्य संग्रह - पुहुप

      ‘पुहुप' मतलब सुगंधित पुष्प। मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती काव्य रचनाओं का यह संग्रह है। कुल 65 कविताओं का यह संग्रह जीवन और प्रकृति से जुड़े अंतहीन सफ़र का सिलसिला लगता हैं। 

अपनी बात कहते हुए पुष्पा जी कहती हैं, “वास्तव में अनुभूतियाँ फूल की सुगंध से भी सूक्ष्म होती हैं। ये अनुभूतियाँ ही कवि का संसार होती हैं। ये ही साहित्य में उतरती हैं और एक रचना जन्म लेती है” (पृ.4) 

सचमुच हर संवेदनशील मन का अपना एक अंदाज होता है, जैसे कि आप लिखती है, 

“कुछ लफ़्ज़ मरे, 

कुछ ख़याल कुचले, 

एक चीत्कार, 

एक सिसकी, 

और नज़्म का जन्म हुआ था। (पृ.30) 

कविताओं का यह सिलसिला प्रकृति, जनजीवन, रिश्तों- नातों से मित्रता तक, हर बहाव से गुजरता जाता है। कविता प्रश्न करती हैं। कविता अंतर्मन की ख़ोज तक उतरती है। जिसमें अपने आप से अनेक प्रकार की चेतावनी भी मिलती है, 

मेरे दो अच्छे मित्र हैं, 

मेरा शरीर, 

मेरा मन, … 

ठोस यथार्थ पर

मेरा अनमना मन, 

एक अंतहीन सफ़र

शुरू करता है (पृ.102) 

कविताओं में उभरी यह सच्चाई कविता की खासियत लगती हैं। सचमुच हर रचनाकार कविता से गहराइयों से जुड़ी अपनी अनुभूति व्यक्त करता है। जैसे कि, 

अंतर से प्रस्फुटित होती है

कविता की तेज धारा, 

और सारा जिस्म, 

लहुलुहान हो जाता है (पृ.124)

कविता जीवन से जुड़ी हुई है। जिसमें जीवन की ख़ोज है। इसलिए कविता अंत में मनुष्य जीवन का वास्तव, मन - देह की विवशता पर मुक्त अभिव्यक्त होती हैं। कविता की शुरुआत और अंत भिन्न हो जाते है। यूँ कहें कि भावनाओं का कोई अंत नही होता है। मन हमेशा मुक्त होता है। जिसका पता भी इन पंक्तियों में मिलता है,

सर्द – सर्द ख़ामोशी को पी लिया

और दर्द को बेनज़ीर बना दिया। 

तब से दर्द शानदार हो गया, 

जीने की अदा सिखा गया (पृ.137) 

'पुहुप' नर्म संवेदनाओं का गुलदस्ता है। मन में उठती तरंगों का कवयित्री ने मोहक शैली में अविष्कार किया है। पाठक पढ़कर इसका जरूर आनंद लेंगे ऐसा विश्वास है। 

द्वारा – लतिका जाधव, पुणे (महाराष्ट्र) 

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पुहुप (कविता संग्रह) 

डॉ. पुष्पा गुजराथी, प्र.सं.2025, 

प्रकाशक . क्षितिज प्रकाशन, पुणे

मूल्य -300/- पृ.सं.138

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. संपादक श्री. देवेंद्र भाई सोनी जी,

    मेरी लिखी समीक्षा प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    लतिका जाधव

    ReplyDelete
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