काव्य :
फाग गीत
फाग मनाएं, होरी गायें,
रंगी चुनरिया,तन लिपटाये ।
अबीर-गुलाल से रंगे कन्हाई,
राधा छुप छुप जायें ।
फाग मनाएं, होरी गायें,
बरसाने की राधा जू प्यारी,
कान्हा से नैन चुरायें।
फाग मनाएं, होरी गायें,
बृज में ऐसी धूम मची है,
ढोल मृदंग बजायें।
फाग मनाएं, होरी गायें,
रंग जमाने आयी है होली,
टोली घर घर जायें ।
फाग मनाएं, होरी गायें,
देख छवि कान्हा की सखियाँ,
हर्षित मन भरमाये ।
फाग मनाएं, होरी गायें,
ग्वाल सखा तैयार खड़े है,
कान्हा मन मुस्कायें ।
फाग मनाएं, होरी गायें,
मोज भयी गोकुल में देखो,
उत्सव फाग मनायें।
फाग मनाएं, होरी गायें,
- आदित्य हरि गुप्ता , भोपाल
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