काव्य :
मुझको न छोड़के जा जान बचाने वाले
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मुझको न छोड़के जा जान बचाने वाले।
मुझ पे हर-वक्त तू ही जान लुटाने वाले।
रिश्ता मेरा तुम्हारा भूलने लायक़ हैं नहीं,
क्यों मुझे भूल रहा दिल में सजाने वाले।
मेरे हालात सताते थे मुझे रात और दिन,
तूने ही दर्द को समझा था भुलाने वाले।
मेरी बुराइयां तुझको न नज्र आई कभी,
मेरी खुश्बू को फिजाओं में बहाने वाले।
तेरे एहसान भुला दूं ये न होगा मुझसे,
दूर मत जाना मेरे दिल में समाने वाले।
मेरे निर्मल हृदय में सिर्फ तू ही छाया है,
राज यह जानते सब लोग ज़माने वाले।
- सीताराम साहू'निर्मल'छतरपुर मप्र ।
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