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काव्य : मजदूर चाहता है - मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई


 काव्य :

 मजदूर चाहता है


दो प्रेम के मीठे से बोल डाल दे थके बदन में जान, 

ये मजदूर चाहता है तुमसे बस थोड़ा सा सम्मान ।

 

परिवार को पालना कर्म कसौटी पर बना लिया धर्म,

पढ़ ना सका कोई मगर श्रमिकों के जीवन का मर्म,

बोझा ढोएं दिन-रात सिर पर रख जिम्मेदारी का भार,

हॅंसकर सहते रहे वो सदा मौसम की आडी़- टेढ़ी मार,

अरे ओ ऊॅंचे महलों वालों ! तुमने नहीं दिया कभी ध्यान ।


कर्म को साक्षी माना भाग्य से नहीं करें वो शिकायत, 

तन-मन से है मजबूत मगर तुमने नहीं समझा लायक,

क्यों करते गरीबी का उपहास नसीब में नहीं जो छत,

आज तुम्हारा समय उत्तम कल आयेगा अपना भी वक्त,

अरे ओ मोटे पैसे वालों ! तुम करते रूपयों का अभिमान ।


मजदूरों की आवाज को सुनने वाले नेक बंदे हैं बस चंद,

आगे-पीछे चले जीवन गाड़ी मगर हौसला हमारा बुलंद,

मेहनत ईमान की रूखी-सूखी रोटी में मिलें हैं संतोष,

भरना नहीं हैं हमको बेईमानी से अपना "आनंद" कोष, 

अरे ओ झिड़कने वालों ! प्रेम नहीं घटाएगा तुम्हारी शान ।

मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई 



देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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