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काव्य : ‘आकाश का राजा’ - श्रीमति आरती चौगुले, पुणे


 काव्य : 

‘आकाश का राजा’

‘‘बाल-विधा’’

देखो दादी आसमान में सूरज राजा आया है।

सात अश्वो पे सवार हो कर सूरज राजा आया है।

नील गगन महल है इसका, सोने का सिंहासन है।

स्वर्ण-मुकुट यह शीष पर धारे, सूरज राजा आया है।

स्वर्णिम रश्मि आभामय हो, जग को आलोकित करती।

झिलमिल तारे आसमान के, नभ को जगमग है करते।

राजा का स्वागत करने, धरती रानी हुई निहाल।

बिन सूरज के नहीं कहीं कुछ, हम सब भी होंगे बेहाल।

सुंदर साडी हरे रंग की, धरा रानी है की है धारण।

पंछी मधुर किलबिल कर के, गीत गा रहे हर्ष के कारण।

सुंदर सुंदर पुष्प खिले है, डोल रहा है तन और मन।

रंग बिरंगी छटा बिखेरे, खिल रहे है वन और उपवन।

हाथ जोड कर मै भी कर रही, सूरज को नमन-वंदन।

हे तेजोमय रवि तेजपुंज से, हम सब को दो नव-स्पंदन।


 - श्रीमति आरती चौगुले, पुणे (मो.नं. 9850960735)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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