नेत्रदान अंगदान जागरूकता अभियान को मिली एक नई गति
नेत्रदान-अंगदान शिविर का आयोजन : रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने लिया नेत्रदान का संकल्प
रांची । नेत्रदान जैसे महादान को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने स्वयं नेत्रदान का संकल्प लेते हुए समाज को प्रेरित किया। उन्होंने न केवल नेत्रदान का फॉर्म भरा, बल्कि लोगों से भी इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के समाज कल्याण (महिला) एवं कला प्रकोष्ठ द्वारा प्रेस क्लब सभागार में आयोजित नेत्रदान–अंगदान सह नेत्र जांच शिविर में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मंत्री संजय सेठ ने कहा कि नेत्रदान एक ऐसा दान है, जो किसी के जीवन में अंधकार को स्थायी रूप से दूर कर सकता है। उन्होंने कार्यक्रम का दीप जलाकर विधिवत् शुभारंभ किया। उन्होंने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़ने का आह्वान किया।
प्रकोष्ठ की अध्यक्ष स्मिता ने मंत्री के इस कदम को प्रेरणादायक बताते हुए आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा तथा अधिक लोग नेत्रदान और अंगदान के लिए आगे आएंगे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पी.के. लाला (मानवाधिकार आयोग) और डॉ. पी. सिन्हा (झारखंड आई बैंक) ने भी नेत्रदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
महासभा के झारखंड अध्यक्ष डॉ. सी.बी. सहाय ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों के साथ इसकी उपयोगिता समझाई। वहीं, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश कुमार ने इस पहल को अभियान का रूप देने का आह्वान करते हुए आयोजक टीम का उत्साहवर्धन किया।
इस दौरान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की आई बैंक एवं स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन , झारखंड द्वारा पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को नेत्रदान और अंगदान की प्रक्रिया एवं महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में नेत्रदान एवं अंगदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। आयोजन को सफल बनाने में प्रकोष्ठ अध्यक्ष स्मिता के साथ प्रीति, उमा सिन्हा, रेणुबाला धार, निर्मला कर्ण, इंदु, रंगोली, सत्या, गुप्तेश्वर और पवन किशोर सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
यह आयोजन न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि समाज में सेवा और मानवता के मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ।
कार्यक्रम के अंत में निर्मला कर्ण ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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