लघुकथा :
छुट्टी
रविवार था।
राकेश ने सामने रखी कुर्सी पर पैर फैलाए और बोला,
“आज तो छुट्टी है… बस पूरा दिन आराम करूंगा। सीमा एक कप गर्मा गर्म चाय और पिला दे।”
सीमा झाड़ू लगा रही थी।
कुछ देर बाद बर्तन, फिर कपड़े, फिर खाना…
सब निपटा कर वह बुरी तरह थक गई थी। सोफे पर बैठ कर उसने सिर पीछे टिका लिया।
राकेश ने पूछा—
“तुम थक गई ? मैंने तो सोचा था आज छुट्टी है। कुछ अच्छी सी स्वीट डिश खिलाओगी खाने के बाद।”
सीमा रुकी, उसकी तरफ देखा—
“तुम्हारी छुट्टी आज है…
मेरी कब है ? बता दो… ।”
राकेश के हाथ से अख़बार धीरे-धीरे नीचे गिर गया।
- डॉ अंजना गर्ग ( सेवानिवृत)
म द वि रोहतक
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कथा कहानी
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