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काव्य : कलम और तू - डा.नीलम , अजमेर


 

काव्य : 

कलम और तू


बेकरार कलम

खो चुकी है तेरी

यादों में गुम

लिखने लगूँ कोई गीत

तो तेरी जुल्फों

के पेंचोखम में खो

जाती है

गजल तो मयकशी

तेरी नजरों से कर

महफिलों में झूम जाती है।


निगोड़ी कलम

माने ना

पलकद्वार खोलकर

दिल के दर

खटखटाए बिना

सीधे प्रवेश कर

धड़कनों के

तार झंकृत कर

नस-नस में मदहोशी

घोल जाती है।


तेरे चेहरे की

मासूमियत पर फिदा

कलम को

कायनात की सुंदरता

भी फीकी

लगती है और फिर

अनायास 

तेरे कजरे की लहक,

लबों की दहक,

साँसों की महक

मेरे शब्दों में समाकर

खूबसूरत कविता 

रचा जाती है।

     -  डा.नीलम , अजमेर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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